Rajya Sabha के सभापति धनकड़ से 'खुन्नस' के चक्कर में कैसे हिट विकेट हो गया INDIA bloc?
Jagdeep Dhankhar News: देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया है। उनका आरोप है कि सभापति उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं देते और उन्होंने चेयर पर पक्षपाती होने का भी आरोप लगाया है। तथ्य यह है कि इंडिया ब्लॉक अकेला विपक्ष नहीं है। ऐसे में इस प्रस्ताव को लेकर गैर-इंडिया ब्लॉक वाले विपक्षी दलों का रोल बहुत अहम हो गया है।
भारत राष्ट्र समिति(BRS),बीजू जनता दल (BJD), वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) खुद को न्यूट्रल पार्टियां कहती हैं। मतलब, यह न तो सत्ताधारी एनडीए गठबंधन से जुड़ी हैं और ना ही कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं।

लोकसभा चुनावों के बाद सत्तापक्ष से दूर होने लगी थीं कुछ न्यूट्रल दल
लोकसभा चुनावों और आंध्र प्रदेश और ओडिशा में हुए विधानसभा चुनावों के बाद देखा गया था कि बीजेडी ने खासकर के बीजेपी के खिलाफ अपना तेवर सख्त कर लिया था। वहीं वाईएसआरसीपी भी आंध्र प्रदेश की राजनीति की वजह इंडिया ब्लॉक के करीब जाती दिख रही थी।
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टीडीपी सरकार के आने के बाद वहां कथित राजनीतिक हिंसा के खिलाफ इसके प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने दिल्ली में प्रदर्शन किया तो इंडिया ब्लॉक से सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव समेत कई नेता उनका समर्थन करने पहुंच गए।
अविश्वास प्रस्ताव ने न्यूट्रल दलों को किया इंडिया ब्लॉक से दूर!
लेकिन, जब इंडिया ब्लॉक ने राज्यसभा के सभापति के खिलाफ देश के इतिहास में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है तो इनमें से कुछ दलों ने स्पष्ट तौर पर विपक्षी गठबंधन से दूरी बनाने की घोषणा कर दी है और जिन्होंने नहीं किया है,उन्होंने भी कम से कम अबतक इस मसले पर उनका समर्थन करने का कोई संकेत नहीं दिया है।
हम न्यूट्रल हैं- बीजेडी
राज्यसभा में इन 4 पार्टियों के 24 सांसद हैं। इनमें से बीजेडी के अकेले 7 एमपी हैं। पहले पार्टी प्रमुख नवीन पटनायक ने इस मुद्दे की समीक्षा करने की बात कही थी, लेकिन पार्टी की ओर से शुरू से ही संकेत दे दिए गए थे कि वह इंडिया ब्लॉक की सियासत के चक्कर में नहीं फंसेगी।
पार्टी के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने टीओआई से कहा,'बीजेडी इंडिया ब्लॉक में शामिल पार्टी नहीं है और इसलिए इस फैसले में भी शामिल नहीं है। हम अपने रास्ते पर हैं, एनडीए और इंडिया से बराबर दूरी पर और इस मुद्दे पर हम न्यूट्रल हैं।'
चेयरमैन के साथ हमारे रिश्ते सौहार्दपूर्ण हैं- वाईएसआरसीपी
वाईएसआरसीपी के राज्यसभा में 8 सांसद हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इसकी ओर से कहा गया कि वह इसमें 'नहीं पड़ना' चाहती। पार्टी सांसद मिथुन रेड्डी ने कहा, 'चेयरमैन के साथ हमारे रिश्ते सौहार्दपूर्ण हैं।'
हमें अविश्वास प्रस्ताव की कोई सूचना नहीं मिली- बीआरएस
हालांकि,बीआरएस ने इंडिया ब्लॉक के साथ जाने की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है, लेकिन पार्टी के सदन के नेता केआर सुरेश रेड्डी ने यह भी कहा है,'निश्चित रूप से सदन चलाना आसान काम नहीं है। हम सभापति की परेशानी को समझते हैं,लेकिन साथ ही हमें यह भी लगता है कि सरकार के सहयोग से सभी विरोधी दलों के साथ और अधिक बैठकें होनी चाहिए थीं। इससे तनाव कम होता।'
उन्होंने यह भी कहा,'जहां तक महाभियोग का सवाल है तो हमें याचिका पर दस्तखत करने के लिए किसी भी पार्टी ने संपर्क नहीं किया है। औपचारिक या अनौपचारिक कोई सूचना (नोटिस के बारे में) हमें नहीं दी गई है।' वैसे लगता है कि बीआरएस क्या करेगी यह आखिरकार तेलंगाना में उसकी कांग्रेस सरकार के साथ समीकरणों पर निर्भर करता है।
कैसे अपनी ही रणनीति से हिट विकेट हो गया इंडिया ब्लॉक?
राज्यसभा की 245 सीटों में से अभी 14 खाली हैं। इंडिया ब्लॉक के पास अपने 85 सांसद हैं और उसमें एक निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल को भी मिला दें तो यह आंकड़ा 86 हो जाता है। जहां तक सत्तापक्ष की बात है तो उसके पास समर्थन वाले कुल सदस्यों का आंकड़ा 121 तक हो जाता है।
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113 एनडीए सांसद हैं,2 निर्दलीय भी सरकार का समर्थन कर रहे हैं और मौजूदा समय में जो 6 मनोनीत एमपी हैं, उन्हें भी सत्तापक्ष के साथ ही गिना जा सकता है। ऐसे में बहुमत के लिए 116 का आंकड़ा जुटाना इंडिया ब्लॉक के लिए दूर की कौड़ी तो है ही,उसने अपनी रणनीति की वजह से करीब आ रहे न्यूट्रल दलों को भी लगता है कि एक तरह से सत्तापक्ष की ओर झुका दिया है!












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