Jagdeep Dhankhar के इस्तीफे पर सस्पेंस खत्म? 7 महीने बाद उपराष्ट्रपति ने तोड़ी चुप्पी, बोले- बीमारी वजह नहीं
Jagdeep Dhankhar Resignation Reason: भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से अचानक दिए इस्तीफे के महीनों बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से चुप्पी तोड़ी है। करीब सात महीने पहले 21 जुलाई 2025 को अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देकर सबको चौंकाने वाले जगदीप धनखड़ एक बार फिर चर्चा में हैं।
गुरुवार,26 फरवरी को अपने होमटाउन राजस्थान के चूरू में उन्होंने उन अटकलों पर विराम लगा दिया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने गंभीर बीमारी के कारण इस्तीफा दिया है।

Jagdeep Dhankhar ने इस्तीफा पर कहा- "मैंने कभी नहीं कहा कि मैं बीमार हूं"
पूर्व सांसद राम सिंह कस्वां के निवास पर आयोजित कार्यक्रम में धनखड़ ने बड़े ही बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, कहते हैं पहला सुख निरोगी काया। मैंने स्वास्थ्य के प्रति कभी लापरवाही नहीं बरती। जब मैंने कहा कि मैं पद त्याग रहा हूं, तो मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं बीमार हूं। मैंने कहा कि मैं अपने स्वास्थ्य को अहमियत दे रहा हूं, और यह देनी भी चाहिए।
उन्होंने साफ किया कि उनका इस्तीफा किसी लाचारी में नहीं, बल्कि अपनी सेहत के प्रति एक सचेत फैसले (Priority) के तौर पर था। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहना हर व्यक्ति की पहली जिम्मेदारी होती है और सार्वजनिक जीवन में रहते हुए भी इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इस्तीफे के पत्र में भी स्वास्थ्य का जिक्र
गौरतलब है कि 21 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति को भेजे अपने इस्तीफे के पत्र में जगदीप धनखड़ ने लिखा था कि वह "स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और डॉक्टरों की सलाह का पालन करने" के लिए उपराष्ट्रपति पद छोड़ रहे हैं। हालांकि, उनके अचानक इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
अचानक इस्तिफे पर राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल
बत दें कि , धनखड़ के इस्तीफे के कुछ समय बाद ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पर सवाल उठाए थे। अगस्त 2025 में राहुल गांधी ने कहा था कि धनखड़ के इस्तीफे के पीछे "एक बड़ी कहानी" है। राहुल गांधी ने उस वक्त कहा था, उनके इस्तीफे के पीछे एक बड़ी कहानी है। कुछ लोग जानते हैं, कुछ नहीं। और फिर यह भी सवाल है कि वह इतने समय से चुप क्यों हैं। भारत के उपराष्ट्रपति अचानक ऐसे हालात में कैसे आ गए कि वह एक शब्द भी नहीं बोल पा रहे और मानो कहीं छिपे हुए हों। जो व्यक्ति राज्यसभा में हमेशा मुखर रहते थे, वह अचानक पूरी तरह शांत हो गए। इन बयानों के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी।
राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जगदीप धनखड़ का यह बयान सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए उन्होंने अपने इस्तीफे को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों का जवाब देने की कोशिश की है। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका फैसला निजी और स्वास्थ्य से जुड़ा था, न कि किसी राजनीतिक दबाव या विवाद का नतीजा।
धनखड़ के इस बयान के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि उनके इस्तीफे को लेकर चल रही कई अटकलों पर विराम लगेगा। हालांकि, राजनीति में बयान और उनकी व्याख्या का सिलसिला अक्सर चलता रहता है। अब देखना होगा कि उनके इस स्पष्टीकरण के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।












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