पेगासस जासूसी मामले पर सरकार ने लोकसभा में दिया जवाब, रिपोर्ट को बताया तथ्यों से परे

नई दिल्ली, 19 जुलाई: देश के कई पत्रकारों, राजनेताओं और दूसरे लोगों की जासूसी के मामले को लेकर मानसून सत्र के पहले दिन आज (सोमवार) संसद में जोरदार हंगामा देखने को मिला है। विपक्ष के हंगामे के बाद केंद्रीय आईटी मंत्री ने लोकसभा में जवाब दिया है। वैष्णव ने इस रिपोर्ट की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये तथ्यों से परे है और इसमें सच्चाई नहीं है।

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    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार का पक्ष रखते हुए लोकसभा में कहा, कल रात एक वेब पोर्टल ने बेहद सनसनीखेज रिपोर्ट दी है। इसमें कई आरोप लगाए गए हैं। संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले प्रेस रिपोर्ट सामने आई। यह भी सिर्फ संयोग नहीं हो सकता। पहले भी व्हाट्सएप पर पेगासस इस्तेमाल को लेकर इसी तरह के दावे किए गए थे। उन रिपोर्टों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था। ये जो रिपोर्ट कल आई है ये देश के लोकतंत्र और हमारी सुस्थापित संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास लगती हैं।

    वैष्णव ने कहा कि डेटा का जासूसी से कोई संबंध नहीं है। केवल देशहित व सुरक्षा के मामलों में ही टैपिंग होती है। जो रिपोर्ट मीडिया में आई गई है, वो तथ्यों से परे और गुमराह करने वाले हैं। फोन टैपिंग को लेकर सरकार के नियम बेहद सख्त हैं। जो आरोप लगाए गए हैं, उनमें सच्चाई नहीं है।

    आईटी मिनिस्टर ने कहा कि मैं सदन के सभी सदस्यों से तथ्यों और तर्क पर मुद्दों की जांच करने का अनुरोध करता हूं। इस रिपोर्ट का आधार यह है कि एक कंसोर्टियम है जिसके पास 50,000 फोन नंबरों के लीक हुए डेटाबेस तक पहुंच है। आरोप है कि इन फोन नंबरों से जुड़े लोगों की जासूसी की जा रही है। वहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा में एक फोन नंबर की मौजूदगी से यह पता नहीं चलता है कि कोई डिवाइस पेगासस की पहुंच में थी या नहीं। वहीं फोन की जांच के बिना निर्णायक रूप से यह बताना संभव नहीं है कि डिवाइस को हैक किया गया या नहीं। ऐसे में जब हम इस मुद्दे को तर्क की कसौटी पर रखते हैं, तो यह स्पष्ट रूप से सामने आता है कि इस सनसनीखेज कहानी के पीछे कोई ठोस तथ्य नहीं है।

    क्या है मामला?

    वॉशिंगटन पोस्ट और द गार्जियन अखबार ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि इसराइल में तैयार साफ्टवेयर पेगासस के जरिए भारत के दो केन्द्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं, सुप्रीम कोर्ट के एक जज, कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता और कई बड़े कारोबारियों के फोन की जासूसी की जा रही थी। इस मामले को लेकप विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में इस विषय पर चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव दिया गया है।

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