Aditya L1 Mission: चंद्रयान की तरह आदित्य को भी सुनहरी परत से लपेटा, जानें क्यों है जरूरी?
Aditya-L1 Solar Mission: भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 की तस्वीर सामने आ चुकी है। इसरो का सोलर मिशन लॉन्च होने को तैयार है। 2 सितंबर को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 11.50 बजे इसे लॉन्च किया जाएगा।
धरती से करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद यह मिशन सूरज पर अध्ययन करेगा। आदित्य-एल1 सूरज और धरती के बीच L1 प्वाइंट पर रहकर सूर्य पर निगरानी रखेगा।

इसरो ने आदित्य-एल1 की फोटो जारी कर दी है। ऐसे में Aditya-L1 पर भी चंद्रयान की तरह सुनहरी परत लपेटी गई है। ऐसे में जानिए क्या होती है यह चीज और स्पेस मिशन के लिए कितनी जरूरी है।
आपने मून मिशन के दौरान चंद्रयान-3 के लैंडर की तस्वीर देखी होगी, उसमें अगर गौर किया होगा तो आपने सोने की परत से लिपटा हुआ देखा होगा। ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल है कि आखिर इस पर सोने जैसी परत क्यों चढ़ाई जाती है।
मल्टी लेयर इंसुलेशन
इस सवाल का जवाब साइंस में छिपा है। क्योंकि किसी भी मिशन से पहले उनके यान (सैटेलाइट) पर सुनहरी लेयर एक बेहद खास वजह से लगाई जाती है। जिस सुनहरी परत को आप सोने की समझ रहे होंगे यह गोल्ड की नहीं होती है। इसे मल्टी लेयर इंसुलेशन यानी एमएलआई कहते हैं।

आपको बता दें कि मल्टी लेयर इंसुलेशन की ज्यादातर परत पॉलिस्टर की बनी होती हैं। इसमें एल्युमिनियम का भी यूज किया जाता है। इसमें एल्यूमीनियम की पतली परत की लेप लगाया जाता है। मानव निर्मित सैटेलाइट पर इसकी कई परतें लगाई जाती हैं।
जानकारी के अनुसार एमएलआई में बाहर की तरफ, जो दिखाई देता है वो गोल्डन और अंदर की तरफ व्हाइट या सिल्वर कलर की फिल्म होती हैं। पॉलिस्टर की एक फिल्म और उस पर एल्यूमीनियम की परत से एक गोल्डन शीट बनती है।
जानिए क्या है काम?
मुंबई के नेहरू तारामंडल के निदेशक अरविंद पराजंपे ने बीबीसी की रिपोर्ट में बताया कि इस तरह की परस वाली शीट अंतरिक्ष यान के उन अहम हिस्सों पर लगाई जाती है, जो विकिरण (रेडिएशन) से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
सैटेलाइट या अंतरिक्ष यान के अभियान के मुताबिक ये तय किया जाता है कि शीट्स का कितना और कैसे यूज करना है। अरविंद पराजंपे के अनुसार ये गोल्डन परत यान को सूर्य की गर्मी से बचाती हैं। इन गोल्डन परत को सूर्य की रोशनी को परिवर्तित करने के लिए लगाया जाता है।
बता दें कि अंतरिक्ष में मिशन के दौरान तापमान बहुत तेजी से बदलता है। जिसका सीधा असर सैटेलाइट के नाजुक उपकरणों पर पड़ सकते हैं। क्योंकि गर्मी के तेजी से बढ़ने पर उपकरण खराब हो सकते हैं।












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