ISRO KID Satellite: PSLV C62 फेल, फिर ‘KID’ कैसे बना मिशन का हीरो! पढें क्यों खास रहा इसरो का यह छोटा सैटेलाइट
ISRO PSLV C62 KID Satellite: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को 13 जनवपी को अपने PSLV-C62 मिशन में लगातार दूसरी बार बड़ा झटका लगा। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुए इस मिशन में 16 में से 15 सैटेलाइट तय कक्षा में नहीं पहुंच सके और अंतरिक्ष में खो गए।
हालांकि, इस असफलता के बीच एक राहत भरी और चौंकाने वाली खबर भी सामने आई-एक छोटा सा प्रयोगात्मक सैटेलाइट 'KID' (Kestrel Initial Technology Demonstrator) सभी बाधाओं के बावजूद रॉकेट से अलग होने और डेटा ट्रांसमिट करने में सफल रहा।

कैसे फेल हुआ ISRO का मिशन?
करीब 44.4 मीटर ऊंचा चार चरणों वाला PSLV-C62 रॉकेट 13 जनवरी की सुबह 10:18 बजे निर्धारित समय पर लॉन्च हुआ। यह मिशन 'EOS-N1' नाम से जाना जा रहा था, जिसका मुख्य उद्देश्य एक प्रमुख अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट और कई सह-यात्री (co-passenger) सैटेलाइट्स को 512 किलोमीटर ऊंची सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित करना था। पूरी उड़ान का समय लगभग 17 मिनट का था।
लॉन्च के शुरुआती चरण सामान्य रहे। मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिक लगातार रियल-टाइम अपडेट दे रहे थे और पहले दो चरणों तक सब कुछ योजना के मुताबिक चलता दिखा। हालांकि, स्थिति तब बदली जब रॉकेट के तीसरे चरण (PS3) के एक्टिव होने की घोषणा की गई।
इसी चरण के दौरान रॉकेट के उड़ान पथ में गड़बड़ी देखी गई। ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि तीसरे चरण में स्ट्रैप-ऑन मोटर्स के थ्रस्ट के दौरान रॉकेट में डिस्टर्बेंस और फ्लाइट पाथ में विचलन देखा गया। इसके कारण रॉकेट तय ऊंचाई और कक्षा तक नहीं पहुंच सका।
KID Satellite ISRO: 'KID' कैसे बना उम्मीद की किरण
इस मिशन में शामिल 16 सैटेलाइट्स में से 15 सैटेलाइट-जिनमें एक विदेशी अर्थ ऑब्ज़र्वेशन पेलोड भी शामिल था-तय कक्षा में स्थापित नहीं हो सके। लेकिन इन सबके बीच स्पेन की एक स्टार्टअप कंपनी Orbital Paradigm का छोटा रिसर्च कैप्सूल 'KID' अलग ही कहानी बन गया।
कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि-हमारा KID कैप्सूल सभी बाधाओं के बावजूद PSLV C62 से अलग हो गया, ऑन हुआ और उसने डेटा ट्रांसमिट भी किया। हम इसकी ट्रैजेक्टरी को फिर से तैयार कर रहे हैं, जल्द पूरी रिपोर्ट साझा करेंगे। 'KID' दरअसल एक री-एंट्री व्हीकल का छोटा प्रोटोटाइप है, जिसे तकनीकी परीक्षण के तौर पर मिशन में शामिल किया गया था।
कौन-कौन से अहम सैटेलाइट खोए?
इस मिशन में कई महत्वपूर्ण भारतीय और विदेशी सैटेलाइट शामिल थे, जो असफल हो गए:
- DRDO का 'Anvesha' - करीब 500 किमी ऊंचाई से सैन्य छलावरण (camouflage) की पहचान करने वाला स्ट्रैटेजिक सैटेलाइट
- AayulSAT - भारत का पहला इन-ऑर्बिट फ्यूलिंग सैटेलाइट
- CGUSAT - छात्रों द्वारा विकसित लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट, जिसे आपदा प्रबंधन और इमरजेंसी कम्युनिकेशन के लिए डिजाइन किया गया था
थाईलैंड और ब्रिटेन द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट
इसरो के मिशन को मिला लगातार दूसरा झटका
यह ISRO के लिए चिंता की बात है क्योंकि इससे पहले मई 2025 में PSLV-C61 (EOS-09) मिशन भी सफल नहीं हो पाया था। उस समय मोटर प्रेशर में गिरावट की समस्या सामने आई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार दो असफलताओं के बाद PSLV सिस्टम की गहन समीक्षा जरूरी होगी। एक पूर्व शीर्ष ISRO वैज्ञानिक ने PTI से कहा कि सभी ग्राउंड स्टेशनों से डेटा इकट्ठा कर उसका विश्लेषण करने में समय लगेगा और इसके बाद ही असली वजह सामने आ पाएगी। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि असफल सैटेलाइट अब स्पेस डेब्रिस के रूप में अंतरिक्ष में भटक सकते हैं।
PSLV-C62 मिशन ISRO के लिए तकनीकी रूप से एक बड़ा झटका जरूर है, लेकिन 'KID' की सफलता यह दिखाती है कि असफलताओं के बीच भी सीख और उम्मीद की जगह बनी रहती है। आने वाले दिनों में ISRO की जांच रिपोर्ट यह साफ करेगी कि तीसरे चरण में आखिर क्या गड़बड़ी हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है।
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