संचार उपग्रह के साथ भारतीय रॉकेट GSLV-D5 ने भरी उड़ान

GSLV D5
श्रीहरिकोटा। देश में स्वदेशी तकनीक से निर्मित प्रक्षेपण यान, जीएसएलवी-डी5 ने एक संचार उपग्रह को लेकर अंतरिक्ष के लिए रविवार को सफल उड़ान भरी। 356 करोड़ रुपये की लागत वाले इस मिशन के दो उद्देश्य हैं। पहला इसरो द्वारा निर्मित क्रायोजेनिक इंजन का परीक्षण और दूसरा संचार उपग्रह को कक्षा में स्थापित करना। इस प्रक्षेपण यान को रविवार अपराह्न 4.18 बजे छोड़ा गया। यह यान, संचार उपग्रह जीसैट-14 को कक्षा में स्थापित करेगा।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण यान ने उड़ान भरी। इसकी लंबाई 49.13 मीटर है और वजन 414.75 टन है। उम्मीद है कि यह 1,982 किलोग्राम वजनी जीसैट-14 को 17 मिनट की उड़ान के बाद उसकी कक्षा में स्थापित कर देगा।

इसरो पिछले साल अगस्त में इस यान का प्रक्षेपण करना चाहता था, लेकिन दूसरे चरण के इंजन से ईंधन के रिसाव की वजह से इसे स्थगित कर दिया गया था। इसरो के अधिकारियों ने बताया कि अब इसमें दूसरे चरण को बदलकर भिन्न धातु से बना नया चरण लगा दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही पहले चरण के कुछ महत्वपूर्ण उपकरणों में बदलाव किया गया है।

इस प्रक्षेपण यान का सफल प्रक्षेपण भारत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसने प्रक्षेपण यान निर्माण की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है। इसके साथ ही यह यान चार टन अधिक भार वहन करने में सक्षम है।

पिछले चार वर्षो में जीएसएलवी का यह पहला अभियान है। इससे पहले 2010 में दो अभियान विफल हो चुके हैं। इसमें से जीएसएलवी के एक रॉकेट ने भारत में निर्मित क्रायोजेनिक इंजन से और दूसरा रूस के इंजन से उड़ान भरा था। इस यान के जरिए भेजे जाने वाले भूस्थैतिक संचार उपग्रह जीसैट-14 का निर्माण 45 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसका जीवनकाल 12 वर्ष होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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