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विदेशी सैटेलाइट की लॉन्चिंग से ISRO को हो रही अच्छी कमाई, सरकार ने राज्यसभा में बताया आंकड़ा

नई दिल्ली, 16 दिसंबर: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वाणिज्यिक प्रक्षेपण के जरिए विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजता है। इससे उसकी कमाई लगातार बढ़ती जा रही। गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान इससे जुड़ा एक सवाल पूछा गया था, जिस पर भारत सरकार ने बताया कि विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के बदले में इसरो को 2019-21 में 35 मिलियन अमेरिकी डॉलर मिले हैं। इसके अलावा 10 मिलियन यूरो अलग से राजस्व के रूप में प्राप्त हुए।

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राज्यसभा में अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसरो अपनी वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के माध्यम से अन्य देशों से संबंधित उपग्रहों को लॉन्च कर रहा है। जिसमें पीएसएलवी की मदद ली जाती है। साथ ही इससे अच्छा राजस्व भी मिलता है। उन्होंने बताया कि एनएसआईएल ने 2021 से 2023 तक के लिए चार देशों के साथ 6 लॉन्च सेवा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके जरिए लगभग 132 मिलियन यूरो का विदेशी मुद्रा राजस्व अर्जित होगा।

जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि प्रक्षेपण यान पर विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण से 2019 से 2021 तक करीब 35 मिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व मिला। इसके अलावा 10 मिलियन यूरो अलग से मिले। जिसमें कुल 124 स्वदेशी उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया। वहीं अगर 34 देशों के उपग्रहों को जोड़ लें तो ये आंकड़ा 343 है। सिंह ने कहा कि भारतीय प्रक्षेपण यान के माध्यम से प्रक्षेपित किए गए विदेशी उपग्रहों में मुख्य रूप से पृथ्वी के अवलोकन, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के उद्देश्य से भेजे गए उपग्रह शामिल हैं।

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