ISRO Chandrayaan 3: सफल रहा पहली ऑर्बिट मैन्यूवरिंग का प्रोसेस, धरती से कितनी ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा
ISRO Chandrayaan 3 तीन के सफल प्रक्षेपण के बाद चांद के करीब पहुंचने के प्रोसेस में है। चांद की सतह पर उतरने से पहले कई बार कक्षा बदलने का प्रोसेस पूरा किया जाना है। 15 जुलाई को दोपहर में कक्षा बदलने के बाद चंद्रयान करीब 5500 किलोमीटर और ऊंचाई पर पहुंच गया है।
चांद की सतह चूमने की तैयारियों में जुटे चंद्रयान तीन को शुक्रवार को 179 x 36,500 किलोमीटर की कक्षा में डाला गया। 15 जुलाई, दोपहर करीब 12.05 बजे चंद्रयान तीन की लंबी दूरी बढ़ाई गई। अब यान 42 हजार किलोमीटर ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रयान तीन की पहली ऑर्बिट मैन्यूवरिंग सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। भारत के मून मिशन से जुड़े इसरो वैज्ञानिकों की टीम लगातार डेटा एनालिसिस कर रहे हैं। करीब 40-45 दिनों के बाद चांद की सतह पर पहुंचने से पहले चार बार धरती और चंद्रयान तीन के बीच लंबी दूरी बढ़ाई जाएगी।
चंद्रयान से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसरो वैज्ञानिकों ने बताया कि चांद की सतह पर पहुंचने से पहले धरती के चारों तरफ पांच बार ऑर्बिट मैन्यूवर होगा। यानी यान की कक्षा बदली जाएगी। खगोल विज्ञान की भाषा में धरती से नजदीकी दूरी को पेरीजी कहा जाता है, जबकि लंबी दूरी एपोजी के नाम से जानी जाती है।
ISRO ने मिशन की डिटेल शेयर करते समय बताया है कि 31 जुलाई के दिन इसरो धरती से 10 गुना दूरी पर पहुंच जाएगा। वैज्ञानिक चंद्रयान-तीन के एक लाख किलोमीटर दूर पहुंचने तक एपोजी में बदलाव करते रहेंगे। इसके बाद यान को चंद्रमा के लिए तय सोलर ऑर्बिट में भेज दिया जाएगा।
सबकुछ प्लान के मुताबिक हुआ तो 17 अगस्त के दिन प्रोपल्शन सिस्टम चंद्रयान तीन के लैंडर-रोवर से अलग हो जाएगा। इसके बाद यान की गति को कम किया जाएगा। ISRO की भाषा में इसे डीबूस्टिंग कहा जाता है। इसकी संभावित तारीख 23 अगस्त है।
इसके बाद लैंडिंग का प्रोसेस शुरू हो जाएगा। इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार, अलग-अलग चरणों में सबसे चुनौतीपूर्ण यही स्टेज है। लैंडिंग सफल रहे इसके लिए विक्रम लैंडर के चारों पैरों की ताकत 2019 की तुलना में और बेहतर बनाया गया है। विक्रम लैंडर को 4 किमी x 2.5 किमी क्षेत्रफल में उतारा जाएगा।












Click it and Unblock the Notifications