कैसे आपके फोन को बंद होने से बचाएगा इसरो का Aditya l1 यान? कई मायने में अहम है ये मिशन
इसरो अंतरिक्ष में एक नई छलांग लगाने को तैयार है, जहां 2 सितंबर को उसका आदित्य एल1 मिशन लॉन्च होगा। ये मिशन सूर्य के अध्ययन के लिए जा रहा। अगर ये सफल रहा तो इससे टेलीकॉम सेक्टर को भी काफी ज्यादा फायदा होगा।
दरअसल हमारे सौरमंडल का ऊर्जा स्रोत अपनी आधी उम्र पूरी कर चुका है। ऐसे में उस पर आए दिन सौर तूफान उठते रहते हैं। वैसे तो ये हमारे ग्रह के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक तो नहीं हैं, लेकिन कम्यूनिकेशन सैटेलाइट को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं।

कई बार सौर तूफान की वजह से सैटेलाइट तबाह हो जाती हैं या फिर उन पर से इंसानों का नियंत्रण हट जाता है। इन्हीं सौर तूफानों की वजह से मोबाइल इंटरनेट और जीपीएस सेवा प्रभावित होती है। जिसे कम्यूनिकेशन ब्लैकआउट भी कहा जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक आदित्य एल1 कोरोनल मास इजेक्शन और सौर तूफानों का विस्तार से अध्ययन करेगा। उसके डेटा के आधार पर भविष्य में सैटेलाइट्स को सौर तूफानों से बचाने की तकनीकी विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा पावरग्रिड और शार्ट वेब कम्यूनिकेशन को भी बचाया जा सकेगा।
पिछले साल बेकाबू हुई थी सैटेलाइट
पिछले साल कई बड़े सौर तूफान आए थे। जिसकी चपेट में गैलेक्सी 15 सैटेलाइट आ गई थी। जिसे अंतरराष्ट्रीय उपग्रह सेवा फर्म इंटलसैट मैनेज करती है। उस वक्त कंपनी का कंट्रोल सैटेलाइट से पूरी तरह से कट गया था। जिससे उसको काफी ज्यादा नुकसान हुआ।
सूर्य के करीब नहीं जा रहा आदित्य
वैसे बहुत से लोगों को लग रहा कि आदित्य एल1 सूर्य के करीब जा रहा, लेकिन ये बात गलत है। वो पृथ्वी से 15 लाख किमी की दूरी पर लैग्रेंजियन पॉइंट तक जाएगा। वहां से उसके पेलोड सूर्य का अध्ययन करेंगे। ये एक ऐसी जगह है, जहां पर किसी ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता है।
पहुंचने में कितने दिन लगेंगे?
इसरो के मुताबिक आदित्य यान 15 लाख किमी की दूरी 120 दिन (4 महीने) में तय करेगा। लैग्रेंजियन पॉइंट पर पहुंचने के बाद ये सूर्य की बाहरी परत, फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर का अध्ययन करेगा। इसके अलावा उसका फोकस सूर्य से निकलने वाली अलग-अलग किरणों पर भी होगा।












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