Aditya L1 FAQ: सौर मिशन पर फोकस क्यों, क्या सूर्य पर जाएगा आदित्य एल-1, जानिए हर सवाल का जवाब

Aditya L1 Launch FAQ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने पहले सूर्य मिशन PSLV-C57/Aditya-L1 मिशन को सफलतापूर्वक 02 सितंबर को लॉन्च कर चुका है।

आदित्य एल-1 की लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से 11 बजकर 50 मिनट पर की गई है। यह लॉन्चिंग पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट से की गई है। आदित्य एल-1 को लेकर लोगों के मन में बहुत सारे सवाल हैं... इस खबर में कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब दिए गए हैं।

Aditya L1 Launch FAQ

Q1. क्या है Aditya-L1?

Ans: आदित्य-एल1 भारत का पहला सौर मिशन है। भारत ने सूर्य के अध्ययन के लिए इन मिशन को लॉन्च कर दिया है। संस्कृत और हिंदी में आदित्य का मतलब 'सूर्य' होता है।

L1 का मतलब लैग्रेंज प्वाइंट-1 है। ये वो जगह है, जहां से आदित्य-एल1 स्पेसक्राफ्ट सूर्य की स्टडी करेगा। धरती और सूर्य के बीच ऐसे पांच प्वाइंट हैं। इसके पहले प्वाइंट को लैग्रेंज प्वाइंट-1 कहा जाता है, जो धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर है।

Q2. क्या आदित्य L1 सूर्य पर उतरेगा?

Ans: नहीं, आदित्य-एल1 न तो सूर्य पर उतरेगा और न ही सूर्य के और करीब आएगा। आदित्य-एल1 पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर, सूर्य की ओर निर्देशित रहेगा, जो पृथ्वी-सूर्य की दूरी का लगभग 1% है। सूर्य गैस का एक विशाल गोला है और आदित्य-एल1 सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करेगा।

Q3. सूर्य तक पहुंचने में कितना समय लगेगा?

Ans: ये अंतरिक्ष यान सूर्य तक नहीं पहुंचेगा। हालांकि लैग्रेंज प्वाइंट-1 तक पहुंचने में अंतरिक्ष यान को 125 दिन यानी 4 महीने का वक्त लगेगा।

Q4. आदित्य एल1 मिशन क्यों?

Ans: भारतीय अंतरिक्ष यान सूरज के सबसे बाहरी सतह का स्टडी करेगा, जिसे फोटोस्फेयर और क्रोमोस्फेयर कहा जाता है। आदित्य एल1 इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और पार्टिकिल फील्ड डिटेक्टरों के जरिए सतह पर ऊर्जा और अंतरिक्ष की हलचलों को दर्ज करेगा।

आदित्य एल1 मिशन अंतरिक्ष के मौसम के बारे में भी स्टडी करेगा। इतना ही नहीं आदित्य एल1 मिशन अंतरिक्ष की हलचलों का स्टडी भी करेगा। ये सोलर विंड और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विचलनों का स्टडी करेगा।

Q5. इसरो का सौर मिशन पर फोकस क्यों?

Ans: इसरो के मुताबिक, अलग-अलग अंतरिक्ष यान और संचार प्रणालियों में गड़बड़ी की आशंका रहती है, इसलिए पहले से ही सुधारात्मक उपाय करने के लिए ऐसी घटनाओं की प्रारंभिक चेतावनी अहम है। इसके अलावा अगर कोई अंतरिक्ष यात्री सीधे ऐसी विस्फोटक घटनाओं के संपर्क में आता है, तो वह खतरे में पड़ जाएगा।

इस मिशन से सूर्य पर विभिन्न तापीय और चुंबकीय घटनाओं के बारे में भी पता चलेगा। इस तरह सूर्य उन घटनाओं को समझने के लिए ये एक अच्छी पहल है।

Q6. आदित्य एल1 मिशन में कितना खर्च हुआ?

Ans: केंद्र सरकार ने साल 2019 में सौर मिशन आदित्य एल1 प्रोजेक्ट को मंज़री दी थी। उस वक्त इसकी लागत 4.6 करोड़ डॉलर करीब थी। हालांकि इसरो ने इसके कुल लागत की अब तक जानकारी नहीं दी है।

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