आतंकवाद पर पीएम मोदी के जैसा ही रुख इजरायल के राष्‍ट्रपति का

भारत में आए इजरायल के राष्‍ट्रपति रूवेन रिवलिन ने कहा भारत और इजरायल दोनों एक जैसे आतंकवाद से पीड़‍ित और साथ मिलकर लड़ेंगे लड़ाई।

नई दिल्‍ली। इजरायल के राष्‍ट्रपति रूवेन रिवलिन अपने छह दिनों के दौरे पर सोमवार को भारत आए हैं। राष्‍ट्रपति रिवलिन पहली बार भारत आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्‍ट्रपति का गर्मजोशी से स्‍वागत किया और फिर राष्‍ट्रपति रिवलिन को राष्‍ट्रपति गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मंगलवार को पीएम मोदी और राष्‍ट्रपति रिवलिन की मुलाकात हुई।

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आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद

इजरायल के राष्‍ट्रपति ने भारत को आतंकवाद की लड़ाई में समर्थन देने का वादा किया है। उन्‍होंने कहा कि आतंकवाद बस आतंकवाद होता है। इसके अलावा मेक इन इंडिया में भी पीएम मोदी की मदद करने का वादा किया है।

पीएम मोदी ने मंगलवार को ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि आतंकवाद भारत के पड़ोस में पल रहा है। उन्होंने एक बार फिर अतंराष्‍ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ कड़ी रुख अपनाने की मांग की।

इजरायल ने यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) में भारत की स्‍थायी सीट का समर्थन किया है।

20 वर्ष बाद किसी राष्‍ट्रपति का भारत दौरा

वर्ष 1997 में आखिरी मौका था जब कोई इजरायली राष्‍ट्रपति भारत आया था। उस समय इजरायल के राष्‍ट्रपति एजेर वाइजमैन ने भारत का दौरा किया था। उसके 20 वर्ष बाद रिवलिन ऐसे इजरायली राष्‍ट्रपति हैं जो भारत आए हैं।

राष्‍ट्रपति रिवलिन के साथ एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भी भारत आया है। रिवलिन अपने इस आधिकारिक दौरे पर आगरा, करनाल, चंडीगढ़ और मुंबई का भी दौरा करेंगे।

पीएम मोदी ने किया राष्‍ट्रपति का स्‍वागत

इसके अलावा पीएम मोदी ने भी राष्‍ट्रपति रिवलिन के भारत दौरे का स्‍वागत किया है। पीएम मोदी ने कहा है कि राष्‍ट्रपति रिवलिन की भारत यात्रा से दोनों देशों के संबंधों को एक नया मौका हासिल होगा।

क्‍लीन एनर्जी पर इजरायल, भारत को बड़ी मदद मुहैया करा रहा है। पीएम मोदी ने भी इजरायल को जल प्रबंधन और दूसरे कई मुद्दों पर भारत का सहयोग करने के लिए इजरायल का धन्‍यवाद किया।

दोनों के बीच कितना व्‍यापार

वर्ष 1992 में दोनों देशों के बीच 200 मिलियन डॉलर का व्‍यापार होता था जिसमें सबसे ज्‍यादा योगदान हीरों के व्‍यापार का था।

वर्ष 2011 यह आंकड़ा 5.19 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। तब से लेकर इसमें 4.5 बिलियन डॉलर की मजबूती आई है। दोनों देशों के बीच 50% व्‍यापार हीरों का होता है।

हीरों के अलावा दवाईयों, कृषि, आईटी और टेलीकॉम के अलावा दोनों देशों के बीच होमलैंड सिक्‍योरिटी को लेकर व्‍यापार होता है।

हाल ही में इजरायल ने चीन, जापान और भारत के साथ आर्थिक रिश्‍तों को मजबूत करने का फैसला लिया है। वर्ष 2000 से नवंबर 2013 तक इजरायल ने भारत में एफडीआई के जरिए 73.7 मिलियन डॉलर का निवेश किया था।

पीएम मोदी जाएंगे इजरायल

भारत और इजरायल के डिप्‍लोमैटिक रिश्‍ते 25 वर्ष पूरे कर लेंगे। पिछले वर्ष राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इजरायल का दौरा किया था। माना जा रहा है कि पीएम मोदी अगले वर्ष तक इजरायल का दौरा कर सकते हैं।

अभी तक पीएम मोदी इजरायल के दौरे पर नहीं गए हैं और इसे लेकर उनकी कभी-कभी आलोचना भी हुई है।

वर्ष 1950 में हुई थी रिश्‍ते की शुरुआत

भारत और इजरायल के रिश्‍तों की शुरुआत 17 सितंबर 1950 में हुई थी। इसके बाद यहां मुंबई में ज्‍यूइश एजेंसी ने एक इमीग्रेशन ऑफिस शुरू किया।

बाद में इसी ऑफिस को ट्रेड ऑफिस में बदल दिया गया और फिर इसे कांसुलेट बना दिया गया।

वर्ष 1992 में दोनों देशों में दूतावास की शुरुआत हुई और राजनयिक रिश्‍ते पूरी तरह से शुरू हुए। इसके बाद से ही इन रिश्‍तों का आगे बढ़ाने का काम जारी है।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्‍हा राव को इजरायल के साथ रिश्‍तों को मजबूत करने का श्रेय जाता है।

रक्षा और कृषि दो ऐसे क्षेत्र हैं जो दोनों देशों के बीच मौजूद रिश्‍तों के अहम स्‍तंभ हैं। हाल के वर्षों में विज्ञान और तकनीक के अलावा शिक्षा और होमलैंड सिक्‍योरिटी के क्षेत्र में भी रिश्‍तों की शुरुआत हुई है।

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