बेबस दलितों के इस्लाम से जुड़ने से दुखी इस्लामिक उलेमा
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) अपनी छत को बचाने की खातिर रामपुर के वाल्मिकी समाज से जुड़े बहुत से लोगों के अपने आप ही इस्लाम स्वीकार करने की घोषणा से मशहूर इस्लामिक धर्मगुरु उमेर इस्लामी बेहद आहत हैं।
वे कहते हैं कि इस तरह से किसी का इस्लाम से जुड़ना गलत है। इसे रोका जाना चाहिए। अखिल भारतीय इमाम संघ के सदर उमेर इलियासी ने कहा कि इस्लाम से उन्हें ही जुड़ना चाहिए जो इसकी शिक्षाओं को मानते-समझते हों।
रामपुर के दलित इस्लाम स्वीकार करेंगे तो बचेंगे उनके घर
मुस्लिम टोपी पहनी
बता दें कि रामपुर की वाल्मीकि बस्ती के 80 परिवारों ने किसी भी इस्लाम धर्मगुरु की ओर से उनका धर्म परिवर्तन न कराए जाने की स्थिति में खुद ही मुस्लिम टोपी पहन ली। इसके बाद मंगलवार को तमाम वाल्मीकि समाज के लोग सड़क पर खड़े हो गए और इस्लामी नारे लगाए।
वाल्मीकि संगठन के नेता भीम अनार्य के नेतृत्व में मंगलवार दोपहर करीब पौने तीन बजे बस्ती के कई लोगों ने मुस्लिम टोपी पहन ली। भीम अनार्य का कहना था कि किसी भी इस्लामिक धर्म गुरु को धर्म परिवर्तन कराने के लिए उनके पास नहीं आने दिया जा रहा है।
कई स्थानीय धर्म गुरुओं पर दबाव है। इसलिए उन्होंने खुद ही यह मुस्लिम टोपी लगाकर इस्लाम धर्म में आस्था जताई है। उन्होंने कहा कि नमाज तो नहीं पढ़ सकते, लेकिन खुदा की इबादत कोई भी कहीं भी कर सकता है।
इस बीच, मुंबई के शिक्षाविद जफर इकबाल ने भी रामपुर में दलितों के इस्लाम से जुड़ने पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार को सारे मामले का हल खोजना चाहिए ताकि दलितों को दबाव में इस्लाम स्वीकार न करना पड़े।
क्या है मामला
रामपुर में नगर पालिका ने सड़क चौड़ीकरण के नाम पर वाल्मीकि बस्ती के 55 मकानों को गिराने के लिए लाल निशान लगाए थे। इसके विरोध में एक हफ्ते से बस्ती के 80 परिवार के लोगों का धरना चल रहा है। धरना दे रहे इन लोगों ने आरोप लगाया था कि नगरपालिका के कर्मचारी सिब्ते नबी ने उनसे कहा कि वे इस्लाम धर्म अपना लें तो उनके मकानों को नहीं तोड़ा जाएगा।
इसके बाद, इन लोगों ने इस्लाम कबूलने की बात कही थी। पीड़ितों का यह भी आरोप है कि धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के पीछे यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खान का हाथ है। सूबे के नगर निगम और नगर पालिकाएं आजम खान के मंत्रालय के तहत आती हैं।
साध्वी प्राची भी पहुंची
वाल्मीकि बस्ती मुद्दे पर शहर पहुंची साध्वी प्राची को रोकने के पुलिस-प्रशासन के तमाम इंतजाम बौने साबित हुए। साध्वी ने बेखौफ अंदाज में प्रदेश की कानून व्यवस्था और आजम खां पर निशाना साधा।













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