रामपुर के दलित इस्लाम स्वीकार करेंगे तो बचेंगे उनके घर

रामपुर नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) तो रामपुर में दलितों को कहा जा रहा है कि अगर वे इस्लाम मजहब से जुड़ जाएं तो उनकी बस्ती को नहीं तोड़ा जाएगा। वहां के बहुत से दलितों ने उनकी बस्ती को न तोड़ने के बदले में इस्लाम को स्वीकार की घोषणा कर दी है।

अगर यह सच है तो कानूनन अपराध है। इसकी छानबीन आवश्यक है। हालांकि अभी वे लोग नियमपूर्वक मुसलमान नहीं बने हैं। वैसे वहाँ मौलाना आये थे उन्हें इस्लाम कबूल कराने, पर स्थिति भांपकर मना कर दिया था। लेकिन घर बचाने के लिये उनलोगों ने इस्लामी टोपी पहन ली। यह प्रतीकात्मक परिवर्तन है।

आजम खान का हाथ

जानकार कह रहे हैं कि रामपुर में जो कुछ हो रहा है उसके पीछे विवादों में रहना पसंद करने वाले उत्तर प्रदेश के दबंग कैबिनेट मंत्री आजम खान है। वे ही मॉल में पार्किंग बनवाने के लिए एक दलित बस्ती को उजाड़ रहे हैं।

दरअसल रामपुर में तोपखाना क्षेत्र में आज़म खान मॉल बनवा रहे हैं, जो बन कर तैयार भी हो गया है। मॉल में पार्किंग बनाई नहीं गयी है। अब पार्किंग के लिए आज़म खान को मॉल के निकट एक 60 साल पुरानी वाल्मीकि बस्ती दिखाई दे गयी। सो आज़म खान ने इस दलित बस्ती के 50 मकानों को तोड़ने का फरमान नगरपालिका को सुना दिया है।

गरीबों की बस्ती टूटेगी

वरिष्ठ लेखक कंवल भारती कहते हैं कि फरमान चूँकि रामपुर के मुख्यमंत्री समझे जाने वाले आज़म खानका है, तो नगरपालिका और रामपुर का पूरा प्रशासन उस गरीब दलित बस्ती को तोड़ने के लिए दलबल के साथ गया।

खराब माली हालत

बता दें कि इस बस्ती के ज्यादातर लोग साफ-सफाई के ही पुराने काम में लगे हुए हैं और उनकी माली हालत इतनी खराब है कि वे अपने दुबारा मकान भी नहीं बना सकते। इसलिए उन्होंने अपने मकानों को बचाने के लिए कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। तो धरने के विरोध में और गरीब दलित बस्ती को तोड़े जाने के आज़म खान के फरमान के समर्थन में शहर की पूरी समाजवादी पार्टी भी धरने पर बैठ गयी।

एक्शन लिया

पुलिस ने धरना देने वाले दलितों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया है, जबकि समर्थन में धरना देने वाले सपाइयों कर कोई कार्रवाई नहीं की गयी। कंवल भारती कहते हैं कि दलितों के मकान एक ही सूरत में ध्वस्त होने से बच सकते हैं, अगर सपा सरकार का मुखिया हस्तक्षेप करे। पर उसकी सम्भावना की कल्पना भी नहीं की जा सकती, क्योंकि रामपुर के मामले में न उनकी चलती है और न वह चलाते हैं।

गरीबों के घरौंदे

इस बीच, राजधानी में दलित मामलों के जानकार एच.सी.यादव ने आजम खान के उक्त कदम की निंदा करते हुए कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आजम खान को कसना चाहिए ताकि वे गरीबों के घरौंदे ना तोड़े।

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