ISI ने DRDO के वैज्ञानिक को हनीट्रैप कर फंसाया, ISRO जासूसी केस में कैसे मामला ही पलट गया था? जानिए
महाराष्ट्र एटीएस जैसे-जैसे डीआरडीओ वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर कुलकर से पूछताछ करेगी तो आईएसआई का और भी राज खुल सकता है। उन्हें महिला की तस्वीर दिखाकर फंसाया गया था।

जासूसी के आरोप में डीआरडीओ के एक वैज्ञानिक की गिरफ्तारी से एक बार फिर से यह चर्चा शुरू है कि किस तरह से पाकिस्तान भारतीय रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां हासिल करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहा है। लेकिन, देश में एक ऐसा मामला भी सामने आ चुका है, जिसमें मामला पूरी तरह से फर्जी साबित हुआ था।

जासूसी के आरोप में डीआरडीओ वैज्ञानिक गिरफ्तार
महाराष्ट्र एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड ने जासूसी के आरोप में डीआरडीओ के वरिष्ठ डायरेक्टर प्रदीप कुरुलकर को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ पाकिस्तानी एजेंट को कथित तौर पर रक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां उपलब्ध कराने को लेकर ऑफिसियल सीक्रेट ऐक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हुआ है।

आईएसआई ने हनीट्रैप से फंसाया
महाराष्ट्र एटीएस का कहना है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हनीट्रैप के जरिए वरिष्ठ भारतीय रक्षा वैज्ञानिक को फंसाया है। उन्हें आईएसआई ने महिला की तस्वीर में उलझाकर अपना शिकार बनाया है। वह कथित तौर पर मैसेजिंग ऐप के माध्यम से वॉयस और वीडियो कॉल से आईएसआई के एजेंट के संपर्क में थे।

डीआरडीओ में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे थे कुरुलकर
प्रदीप कुरुलकर ने डीआरडीओ में युद्धक वाहन से जुड़े क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने के लिए 1988 में चेन्नई में ज्वाइन किया था। वह मिसाइल लॉन्चर, मिलिट्री इंजीनियरिंग उपकरण, एडवांस रोबोटिक्स और मोबाइल अनमैन्ड सिस्टम फॉर मिलिट्री एप्लीकेशन के एक्सपर्ट है।

दुश्मन देश को संवेदनशील जानकारी देने के आरोप
महाराष्ट्र एटीएस के मुताबिक, 'वैज्ञानिक ने, अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, यह जानते कि उनके पास जो ऑफिसियल सीक्रेट हैं, अगर दुश्मन देश के हाथ लग जाए तो देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है, उस संवेदनशील जानकारियों को अवैध तरीके से दुश्मन देश को उपलब्ध करवाया।'

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फर्जी जासूसी केस में फंसे थे इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायण
लेकिन, इसरो के वरिष्ठ एयरोस्पेस वैज्ञानिक नंबी नारायण को जासूसी के नाम पर बहुत बड़ी साजिश (अंतरराष्ट्रीय) का शिकार बनाया गया था। उन्हें झूठे जासूसी केस में फंसाया गया था और इसकी वजह से उन्हें बहुत ही ज्यादा यातनाएं झेलनी पड़ी थी।

1994 में जासूसी केस में हुए थे गिरफ्तार
नंबी नाराण को 1994 के जासूसी केस में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन, जांच के बाद सीबीआई ने केरल हाई कोर्ट को इसी साल जनवरी में बताया कि उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह से अवैध थी। उन्हें पूरी तरह से फर्जी जासूसी केस में गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस और आईबी अधिकारियों पर साजिश में शामिल होने के आरोप
अदालत में नंबी नारायण के वकील ने बताया कि किस तरह से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान को नाकाम करने के लिए कथित तौर पर विदेशी शक्तियों के साथ मिलकर पुलिस और आईबी अफसरों ने यह साजिश रची थी। नारायण एक प्रभावशाली लिक्विड प्रोपेलेंट इंजन वैज्ञानिक हैं।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद रिहा हुए थे नंबी नारायण
उनके मामले में सबसे दुखदायी यह रहा कि 1998 में सीबीआई अदालत और सुप्रीम कोर्ट से छोड़े जाने के बाद भी उन्हें अपने सहयोगी वैज्ञानिक डी शशिकुमार और चार अन्य लोगों के साथ 50 दिन जेल में गुजारने पड़े थे। उन्होंने खुद पर लगे फर्जी आरोपों से छुटकारा पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है।
पद्म भूषण से हुए सम्मानित
उन्होंने अपनी किताब में बताया है कि कैसे पुलिस अधिकारियों ने उन्हें इस केस में गलत तरीके से फंसाया। 2019 में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया। उनकी दर्दनाक कहानी पर आर माधवन के निर्देशन में 'रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट' नाम की फिल्म भी बनी है। (डीआरडीओ के विकसित उपकरणों की तस्वीर सिर्फ सांकेतिक तौर पर इस्तेमाल किया गया है)












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