'ऑपरेशन सर्जन' कोड वर्ड से भारत में आईएसआई के लिए हो रही थी जासूसी
नई दिल्ली। देश में पाकिस्तान की इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई की ओर से जारी जासूसी करने वाले एक बड़े रैकेट का भांडा पिछले दिनों फूट गया। भारतीय सेना, बीएसएफ और पुलिस में मौजूद आईएसआई के यह जासूस देश से जुड़ी कई संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान को पहुंचा रहे थे।

आईएसआई ने इस पूरे कांड को , 'ऑपरेशन सर्जन,' नाम दिया हुआ था। 'ऑपरेशन सर्जन' वह कोड था जिसे सेना का हवलदार फरीद खान की ओर से प्रयोग किया जा रहा था। फरीद को पिछले दिनों अहम जानकारियां पाक को पहुंचाते हुए पकड़ा गया है।
इस पूरे एपिसोड को लेकर देश में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। इस जांच में साफ है कि जासूसी के इस पूरे रैकेट को आईएसआई ने सही तरीके से स्थापित कर रखा था। आईएसआई की ओर से जानकारियां हासिल करने के लिए कई तरीकों से कोशिशें की जा रही थीं।
इस रैकेट में शामिल एक स्कूल टीचर का रोल भी जासूसी में काफी अहम है। जम्मू के राजौरी का रहने वाला और पेशे से टीचर सबर पर आरोप हैं कि वह इंडियन आर्मी के सर्विंस और रिटायर्ड हवलदारों के साथ संपर्क कराने का काम करता था।
पुलिस अब इस पूरे प्रकरण में शामिल आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर जांच कराने पर विचार कर रही है। पकड़े गए आरोपियों में सबर, फरीद खान और मुनववर मीर को आमने-सामने बैठाकर जांच की जा सकती है। सबर और मीर को राजौरी से पुलिस ने पकड़ा था तो वहीं फरीद खान कोलकाता से गिरफ्तार हुआ था।
हालांकि इन सभी लोगों ने जासूसी में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया है। दिल्ली पुलिस की ओर से जो जांच की जा रही है उसके मुताबिक इनके पास कई अहम जानकारियां मौजूद हैं। साथ ही पुलिस के पास इस बात के भी सुबूत हैं कि ये सभी लोग आईएसआई के रैकेट का हिस्सा थे और 'ऑपरेशन सर्जन,' इस कोड का प्रयोग करते थे।
पुलिस को पैसे के लेन देन का पता लगा है और इन सभी के जासूसी से जुड़े होने से जरूरी सारा सामान भी मिला है। फिलहाल पुलिस सारी सामग्री की जांच कर रही है।
यह पता लगाने की भी कोशिश हो रही है कि क्या वाकई कोई अति संवेदनशील जानकारी आईएसआई को पहुंचाई गई है।
पुलिस के मुताबिक फरीद, मीर और सबर पहली बार राजौरी में मिले थे। सबर ने ही फरीद और मीर को जासूसी के रैकेट में शामिल किया था। क्योंकि सबर आर्मी का हिस्सा नहीं था, उस पर लोगों का शक भी नहीं हो पाता।
मीर जो कि सेना से रिटायर हो चुका है, उस पर अपने संपर्कों को जानकारियों के लिए प्रयोग करने का आरोप है। वहीं फरीद ट्रांसफर पर कोलकाता गया था लेकिन उस पर भी अहम जानकारियां आईएसआई तक भेजने का आरोप है।












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