क्या भारत में भी आने वाला है ऊर्चा संकट ? चीन और UK में किल्लत के बाद मंत्री ने बताई अंदर की बात
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर: भारत भी आने वाले महीनों में बिजली संकट झेल सकता है। इस तरह की आशंका जताए जाने के बाद केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने वर्तमान में देश में कोयले के स्टॉक और बिजली स्टेशनों तक उसकी आपूर्ति को लेकर स्थिति साफ करने की कोशिश की है। गौरतलब है कि कोविड के चलते दुनियाभर के देशों में कोयले का उत्पादन घट गया था। लेकिन, अब सबकुछ खुलने से जितनी तेजी से बिजली घरों के लिए कोयले की मांग बढ़ी है, उस हिसाब से उसका उत्पादन बढ़ाने में वक्त लग रहा है। चीन में इसके चलते कितना भीषण संकट आया हुआ है, वह दुनिया जानती है। सवाल है कि क्या भारत में भी वैसी स्थिति आने की नौबत आ सकती है ?

देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है
बिजली मंत्री आरके सिंह ने मंगलवार को कहा है कि अभी तक कोयले की किल्लत के चलते देश में बिजली की संकट नहीं आई है और फिलहाल इसकी कटौती की नौबत नहीं आई है। लेकिन, उन्होंने यह माना है कि कोयले की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने यह भी भरोसा दिया है कि अगले कुछ दिनों में कोयले की मांग के हिसाब से आपूर्ति होने की उम्मीद है। बिजली मंत्री ने मंगलवार को एनडीटीवी से कहा है, 'यह बिजली संकट नहीं है। हम देश की सारी मांग को पूरा कर रहे हैं और मांग बढ़ रही है। कल 15,000 मेगावॉट की डिमांड थी, जो कि पिछले साल इन्हीं दिनों के मुकाबले ज्यादा है......यह एक अच्छी खबर है।' लेकिन, सरकार पहले ही कह चुकी है कि आने वाले महीनों में कोयले की कमी और महामारी के बाद मांग बढ़ने के चलते ऊर्जा की आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। यह वैसी ही समस्या है, जो चीन और यूनाइटेड किंग्डम भुगत रहा है।
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कोयले की सप्लाई पर निगरानी रख रहे हैं- बिजली मंत्री
तथ्य ये है कि भारत में कोयले पर करीब 70 फीसदी बिजली उत्पादन निर्भर है और इस जीवाश्म ईंधन का तीन-चौथाई हिस्सा घरेलू खनन के ही भरोसे है। आरके सिंह ने भी उसी ओर इशारा करते हुए कहा है कि 'कोयले की सप्लाई ही ऐसा है, जिसपर हमें निगरानी रखनी है। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, क्योंकि खदानों से रोजाना कोयला निकाला जाता है। हम इसे प्रतिदिन के आधार पर मॉनिटर कर रहे हैं। विद्युत सचिव के अधीन हमारा एक ग्रुप है, जिसमें कोयला मंत्रालय के साथ-साथ रेलवे के सदस्य हैं। इसलिए, जो भी मांग है, हम उसे पूरा कर रहे हैं।'

'बारिश से भी कोयले का उत्पादन बाधित हुआ'
गौरतलब है कि चीन के साथ भी यही दिक्कत हुई है। पिछले कुछ दशकों में बाकी देशों में भी परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों के आधुनिकीकरण पर खर्चा नहीं हुआ है। और कोरोना के दौरान उत्पादन घट जाने से ज्यादा कोयला स्टॉक में नहीं था। जब महामारी का असर कम होना शुरू हुआ और चीन में उद्योगों के साथ-साथ घरों में बिजली की खपत बढ़ गई तो बिजली उत्पादन के लिए कोयले की कमी पड़ने लगी। चारों तरफ हाहाकार मच गया। भारत में कोयला उत्पादन की मौजूदा स्थिति के बारे में मंत्री का कहना है कि 'कोयलांचलों में बेशक बारिश एक समस्या हो गई थी। कल भी झारखंड, छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में बारिश हुई है। कोयले का खनन भी प्रभावित हुआ है। लेकिन, हम इसे संभाल रहे हैं और हम ठीक हैं।'

धीरे-धीरे कोयला उत्पादन में इजाफे का दावा
उनका दावा है कि हम मांग की आपूर्ति करने की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा है, 'जो भी मांग है हम उसे पूरा करने की स्थिति में हैं। कोयला भेजना भी बढ़ गया है। कल 268 रैक भेजा गया। एक दिन पहले की तुलना में 16 रैक ज्यादा भेजा गया। अब बारिश थम गई है तो और भी ज्यादा भेजा जाएगा।' मंगलवार को कुछ रिपोर्ट छपी थीं, जिसमें बिजली मंत्री ने कहा था कि आने वाले महीनों में कोयले की किल्लत और कोविड के बाद वाली स्थिति में मांग बढ़ने से बिजली की सप्लाई की समस्या बढ़ने की आशंका है।

क्या भारत में भी आ रहा है ऊर्चा संकट ?
दरअसल, सितंबर के आखिर में भारत में कोयले से चलने वाले बिजली स्टेशनों के पास औसतन चार दिनों का ही स्टॉक बचा था, जो कि पिछले कई वर्षों में सबसे कम था। आधे से ज्यादा प्लांट अलर्ट पर हैं और सरकार कुछ बंद पड़ी बिजली घरों को भी शुरू करने पर विचार कर रही है। देश में सबसे ज्यादा कोयले की आपूर्ति करने वाली पब्लिक सेक्टर की बड़ी कंपनी कोल इंडिया ने कहा है कि वह पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति जारी रखने के लिए 'युद्धस्तर' पर काम कर रही है।












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