• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

क्या देश में कैश की कमी हो गई है?

By Bbc Hindi
पटना में एक एटीएम पर लगी कैश नहीं है की पर्ची दिखाता एक व्यक्ति
Press Trust of India
पटना में एक एटीएम पर लगी कैश नहीं है की पर्ची दिखाता एक व्यक्ति

मध्य प्रदेश के एक किसान को इस हफ़्ते अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखने पड़े क्योंकि उन्हें अपनी बेटी की शादी के लिए पैसों की ज़रूरत थी. किसान के मुताबिक़ वह पैसे निकालने लगातार दो दिन तक बैंक गए लेकिन बैंक ने कहा कि पैसे ख़त्म हो गए हैं.

ये सिर्फ़ एक जगह का मामला नहीं है. भारत के कम से कम पांच राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और बिहार में कैश की भारी किल्लत की ख़बरें आ रही हैं.

एटीएम के सामने लगी लंबी कतारों को देखकर नवंबर 2016 की यादें ताज़ा हो जाती हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हज़ार और पांचसौ के नोटों पर रोक लगा दी थी.

प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक़ नोटबंदी का वह फ़ैसला काले धन को हटाने के लिए लिया गया था. इसका असर उस वक़्त चलन में मौजूद कैश के तक़रीबन 86 फ़ीसदी नोटों पर पड़ा था.

हालांकि नोटबंदी के बाद तक़रीबन सारा रोका गया पैसा बैंकों में वापस आ गया जिसके चलते कुछ अर्थशास्त्रियों ने नोटबंदी को 'एक बड़ी असफलता' भी बताया.

तो अब 2018 में अचानक कैश की कमी कैसेहो गई?

कम से कम पांच राज्यों में रहने वाले 30 करोड़ लोग इस वक़्त कैश की किल्लत झेल रहे हैं.

वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि फ़रवरी के बाद से कैश की मांग अचानक बढ़ गई है जिस वजह से कैश की कमी देखने को मिल रही है.

अप्रैल के ही शुरुआती 13 दिनों की बात करें तो जिन पांच राज्यों में कैश की भारी कमी दर्ज की जा रही है वहां चलन में मौजूद मुद्रा में 10 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा का उछाल देखने को मिला.

कुछ अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है कि लोग कैश जमा कर रहे हैं, हालांकि इसके पीछे कोई वजह नहीं बताई जा रही.

क्या लोग ज़्यादा पैसे निकाल रहे हैं?

वहीं कुछ हलकों में ऐसी आशंकाएं भी जताई गई थीं कि लोगों ने अचानक बहुत सारा पैसा निकाल लिया है क्योंकि सुनने में आ रहा था कि सरकार ऐसा क़ानून लाने वाली है जिसके चलते लोगों के पैसे से बैंकों के कर्ज़ उतारे जाएंगे.

लेकिन बैंकों में जमा पैसे में कोई कमी नहीं आई है इसलिए इस आशंका में भी कोई दम नहीं दिखता.

कुछ अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में किसानों के भुगतान और कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनावों के चलते कैश की मांग अचानक बढ़ गई है.

अर्थशास्त्री अजित रानाडे इसके पीछे 2000 के नोट को सबसे बड़ा दोषी मानते हैं.

2000 का नोट मोदी सरकार ने 2016 में जारी किया था जिससे नोटबंदी के बाद आई किल्लत को जल्दी से जल्दी पूरा कर सके.

इस समय अर्थव्यवस्था में चल रहे नोटों में से 60 फ़ीसदी 2000 के हैं लेकिन इन्हें इतना इस्तेमाल नहीं किया जाता जितना बाक़ी नोटों को.

डॉक्टर रानाडे को लगता है कि हो सकता है कि कुछ लोग टैक्स चोरी के लिए 2000 के नोट जमा कर रहे हैं.

लोगों ने डिजिटल भुगतान कम कर दिए हैं

अधिकारियों का यह भी मानना है कि कई जगह एटीएम मशीनों का खराब होना और कई बार उनमें कैश भरने में होने वाली देरी के चलते भी कैश की किल्लत सामने आ रही है.

जानकार ऐसी आशंका भी जता रहे हैं कि कहीं यह कैश की कमी नोटबंदी के बाद के आर्थिक विकास और चलन में जारी मुद्रा के बीच कमज़ोर सामंजस्य का नतीजा तो नहीं है.

एटीएम में पैसा भरने वाले कह रहे हैं कि उन्हें अप्रैल से मशीनों में भरने के लिए पूरा कैश नहीं मिल रहा लेकिन रिज़र्व बैंक का कहना है कि बैंकों के पास पर्याप्त पैसा है और चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है.

लेकिन इसी के साथ रिज़र्व बैंक ने ये भी बताया कि नोट छापने का काम तेज़ कर दिया गया है जिससे मामला थोड़ा और उलझा नज़र आता है.

इसके अलावा एक बात यह भी है कि भारत के लोगों ने डिजिटल भुगतान को कम कर दिया है और ज़्यादातर सामान्य लेन-देन फिर से कैश से ही होने लगे हैं.

साथ ही ये भी हो सकता है कि नोटबंदी के बाद जिस गति से अर्थव्यवस्था बदली, उस हिसाब से करेंसी की सप्लाई नहीं हो सकी है.

इन्हीं सब वजहों से नोटबंदी का भूत एक बार फिर लोगों को डराने लगा है.

ये भी पढ़ेंः

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Is there a lack of cash in the country

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X