मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं राहुल गांधी !

राजस्थान को ही ले लीजिये यह महज एक संयोग तो नहीं कहा जा सकता है कि उनका भाषण दोनों जगह एक जैसा था। अगर आप कुछ भावनात्मक वाक्यों को हटा दें तो पायेंगे कि राहुल का भाषण प्रत्येक जगह समान ही रहता है। जो कि श्रोताओं को खास प्रभावित नहीं करता है। हम ऐसा नहीं कह रहे हैं कि सिर्फ भाषण देने से ही कोई बड़ा नेता बनता है, पर यह भी एक सच है कि प्रभावशाली भाषण ही श्रोताओं को किसी भी नेता से जोड़ने का काम करता है।
अगर नरेंद्र मोदी की बात करें तो उनकी भाषण शैली, भाषण के तत्व स्रोताओं में एक उत्साह पैदा कर रहे हैं। अभी तक देश के जिन हिस्सों में मोदी की रैलियां हुई है उन्हें सुनने के लिए भारी भीड़ इकट्टा हुई है। अब अगर काम की बात करें तो मोदी ने अपने गुजरात मॉडल द्वारा देश विदेश की जनता को प्रभावित किया है। वहीं मीडिया चैनलों ने भी इसका प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मोदी जो कुछ भी कर रहे हैं, वो चुनाव जीतने के लिये कर रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि राहुल क्या कर रहे हैं? अगर मोदी चार तीर चलाते हैं, तो राहुल की ओर से कम से कम एक तीर तो चलना ही चाहिये। ऐसा नहीं हो रहा है। ऐसे में क्या यह नहीं लगता कि कांग्रेस ने राहुल के रूप में मोदी के विरुद्ध कम अनुभवी और जमीनी स्तर की समझ न रखने वाले नेता को उतारा है, जो मोदी के लिये 'प्लस प्वाइंट' साबित हो रहा है। राहुल का एक जैसा भाषण और विकास को लेकर कोई साफ योजना न होने से भी मोदी, राहुल पर लीड लेते हुए दिखाई दे रहे हैं।
रामपुर, अलीगढ़ में जिस प्रकार राहुल गांधी ने भाषण दिये, उस प्रकार के वो जितने भाषण देंगे, उतनी बार मोदी के वोट पक्के होंगे। सच पूछिए तो राहुल की कमजोरी धीरे-धीरे मोदी की दावेदारी को मजबूत कर रही है। अगर राहुल गांधी अपनी तरकश से कोई ब्रह्मास्त्र नहीं निकाल पाये, तो मोदी को पीएम बनने से कोई नहीं रोक पायेगा।












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