मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस के लिए 'सेल्फ गोल' की तरह क्यों है?
केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के पक्ष में कांग्रेस ने यही दलील दी है कि वो चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर हिंसा पर सदन में बोलें। पार्टी लगातार आरोप लगा रही है कि बीजेपी सरकार ने मणिपुर की जातीय हिंसा रोकने में सक्रियता नहीं दिखाई है और पीएम मोदी देश-विदेश घूम आए हैं, लेकिन वहां नहीं गए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी सदस्यता लौटने के बाद लोकसभा में बोले तो उन्होंने इसी मुद्दे पर पीएम मोदी को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा, 'मैं मणिपुर गया। पीएम मोदी वहां एक बार भी नहीं गए। पीएम मोदी के लिए मणिपुर हिंदुस्तान का हिस्सा नहीं है। प्रधानमंत्री ने मणिपुर को दो हिस्सों में बांट दिया है।'

पीएम मोदी को मिलेगा चुनावी टोन सेट करने का मौका!
बहरहाल, राहुल गांधी या उनकी पार्टी से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मोदी सरकार या सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जो भी हमले होंगे, उसका जवाब देने के लिए उन्हें संभत: गुरुवार को मौका मिलेगा। जानकार मानते हैं कि मणिपुर पर सिर्फ पीएम को सदन में बोलने के लिए मजबूर करने की रणनीति कांग्रेस को फिर से भारी पड़ सकती है। क्योंकि, अतीत यही कहता है कि पीएम को सदन में बोलने का मौका देना, उन्हें चुनावी टोन सेट करने का मौका देना साबित हो सकता है।
मुझे कोई शक नहीं कि वो फिर ऐसा ही करेंगे-पिनाकी मिश्रा
गौरतलब है कि मंगलवार को बीजेडी के सांसद पिनाकी मिश्रा ने भी लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में बोलते हुए कांग्रेस की अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति को लेकर कुछ बेहद गंभीर टिप्पणियां की थीं। उन्होंने जो कुछ कहा था, उसका लब्बोलुआब ये था कि 'पीएम मोदी जैसा निर्भीक वक्ता आज भारत में कोई नहीं है, यह सभी मानते हैं.....। वे जब भी सदन में जवाब देते हैं तो कांग्रेस को चेहरा बचाने के लिए नाक कटवाने की नौबत आ जाती है। मैं समझ नहीं पाता कि फिर ये ऐसा क्यों करते हैं.....उन्हें सदन में आने के लिए कहते हैं...और मुझे कोई शक नहीं कि वो फिर ऐसा ही करेंगे.....जब वे (पीएम मोदी) गुरुवार को जवाब देंगे। इसलिए इसमें न तो कॉमन सेंस है, न लॉजिक है और न ही राजनीतिक समझदारी है।'
पिछले अविश्वास प्रस्ताव में पीएम मोदी ने पलटी थी सियासी बाजी
गौरतलब है कि बीजू जनता दल न तो बीजेपी की अगुवाई वाले सत्ताधारी एनडीए का हिस्सा है और न ही नए-नवेले विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल है। पीएम मोदी की सरकार मौजूदा कार्यकाल में पहले अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रही है। पिछले कार्यकाल में भी विपक्ष लगभग इसी समय एक अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था। तब विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की थी। लेकिन, पीएम मोदी ने अपने जवाब से सियासी बाजी ही पलट दी थी।
राहुल ने तब भी दिखाए थे आक्रमाक तेवर
तब राफेल डील को लेकर कांग्रेस मोदी सरकार पर बहुत ही आक्रामक थी। राहुल तब कांग्रेस अध्यक्ष थे। जब उन्हें सदन में बोलने का मौका मिला तो उन्होंने यहां तक दावा किया पीएम मोदी और अमित शाह सत्ता से बदखल होने को लेकर डरे हुए हैं। उन्होंने राफेल सौदे को लेकर सीधे पीएम पर हमला करने से भी कोई परहेज नहीं किया था।
राहुल ने दावा किया था-घबराए हुए हैं पीएम
राहुल यहां तक आरोप लगा गए थे कि पीएम राफेल जेट 'घोटाले' (सुप्रीम कोर्ट से दावा खारिज हो चुका है) में 'भागीदार' हैं, जबकि उन्होंने 'चौकीदार' बनने का वादा किया था। कांग्रेस नेता यहां तक बोल गए कि पीएम घबराए हुए लग रहे थे और उनसे आंखें नहीं मिला पा रहे थे, क्योंकि 'वे सच्चे नहीं हैं।'
राहुल पीएम मोदी से जबरन गले भी मिले थे
राहुल सिर्फ बोले ही नहीं थे, बल्कि देश के सामने संसद के अंदर उन्होंने अजीब चीज करके भी दिखाया था। वे अचानक उठकर पीएम मोदी की सीट तक गए और उनसे हाथ मिलाया। फिर पीएम से उठने के लिए कहा ताकि उनके गले लग सकें। अचानक उनकी इस हरकत से पीएम मोदी भी हैरान थे। हालांकि जब वे अपनी सीट से नहीं उठे तो राहुल खुद ही उनके गले लगकर लौट आए और अपनी सीट पर आकर यूपीए सांसदों की ओर देखकर आंखें मार दीं।
राहुल के आंख मारने की हरकत पर स्पीकर ने आपत्ति की थी
कांग्रेस नेता की इस हरकत पर यूपीए सांसदों ने तो उन्हें खूब सराहा, लेकिन पीएम से इस तरह से गले मिलने की राजनाथ सिंह ने आलोचना की और स्पीकर ने भी सदन में आंख मारने की हरकत पर आपत्ति जताई।
पीएम मोदी ने पलटवार करके बाजी पलट दी
इसके बाद जब प्रधानमंत्री मोदी की जवाब देने की बारी आई तो उन्होंने अपने भाषण से सारा परिदृश्य ही बदल दिया। उन्होंने विपक्ष खासकर कांग्रेस पर प्रहार करने के लिए शब्दों की कोई कमी नहीं होने दी। राहुल की टिप्पणियों पर सीधा पलटवार करते हुए गांधी-नेहरू खानदान के लिए 'ठेकेदार' और 'सौदागर' शब्दों का इस्तेमाल किया।।
राहुल के बर्ताव पर की थी गंभीर टिप्पणी
उसी भाषण में पीएम मोदी ने विपक्ष को 2023 में (यानी पांच साल बाद) अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी करने को कहकर ऐसी भविष्यवाणी कर दी, जो आज पूरी तरह से सही साबित हुई है। राहुल जिस तरह से उनके पास आए थे, उसपर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि किसी को प्रधानमंत्री की कुर्सी हथियाने की बहुत जल्दी है। उन्होंने तब कहा था, 'सिर्फ इस देश के 125 करोड़ लोग ही' कहेंगे कि प्रधानमंत्री मंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा।
वैसे 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव से लेकर पिछली बार के गुजरात विधानसभा तक के चुनाव के बीच ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पीएम मोदी के लिए कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जो आखिरकार प्रधानमंत्री के लिए ही उनके खिलाफ हथियार साबित हुआ है। इसमें 'मौत का सौदागर', 'नीच आदमी', 'चौकीदार चोर है', जैसी बातों को गिना जा सकता है।












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