क्या अब सबरीमाला मंदिर में टूटेगी 1500 साल पुरानी परंपरा?
नयी दिल्ली। महाराष्ट्र में शनि शिंगणापुर मंदिर में 400 साल पुरानी परंपरा टूट गई। कोर्ट के दखल के बाद मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत मिल गई। ऐसे में अब सवाल ये है कि क्या केरल के सबरीमाला मंदिर में 1500 साल पुरानी परंपरा टूटेगी? क्या सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश मिलेगा?

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर रोक के खिलाफ सुनवाई होनी है। पुरानी मान्यता के अनुसार सबरीमाला मंदिर में परंपरा के मुताबिक, 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर बैन है। ऐसे में इस परंपरा के खिलाफ केरल के यंग लॉयर्स ओसोसिएशन ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
क्या अब सबरीमाला मंदिर में टूटेगी 1500 साल पुरानी परंपरा?
क्यों लगा बैन?
दक्षिण भारत के केरल में स्थित सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर मक्का-मदीना के बाद दूसरे सबसे बड़े तीर्थ स्थानों में से माना जाता है। इस मंदिर में हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की भींड़ जुटती है, जिसमें केवल पुरुष ही होते हैं। यहां महिलाओं की एंट्री नहीं होती। माना जाता है कि भगवान श्री अयप्पा ब्रह्माचारी थे इसलिये यहां 10 से 50 वर्ष की लड़कियों और महिलाओं का आना वर्जित है। छोटी बच्चियों को प्रवेश की छूट है।
क्या है खासियत?
ये मंदिर अपनी मान्यताओं को विश्वास की वजह से मशहूर है। इस मंदिर के पट साल में दो बार खोले जाते हैं। 15 नवंबर और 14 जनवरी को बस दो ही बार इस मंदिर के कपाट खुलते हैं। इन दिनों भक्त घी से भगवान की मूर्ती का अभिषेक कर के मंत्रों का उच्चारण होता है।
यहां आने वाले भक्तों को कम से कम दो महीने पहले मास-मछली और तामसिक प्रवृत्ति वाले खाद्य पदार्थों का त्याग करना पड़ता है। इस मंदिर तक जाने वाली सीढ़ियों का खास महत्व है। कहते हैं कि भगवान को देखने के लिये आपको अपनी पांचों इंद्रियों का प्रयोग करना चाहिये।
शिंगणापुर में 400 साल मन्यता टूटी
शनि शिंगणापुर मंदिर में 400 साल पुरानी मान्यता को कोर्ट के आदेश के बाद समाप्त कर दिया गया। चैत्र नवरात्र के पहले 7 अप्रैल को शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को प्रवेश मिल गया। कोर्ट के आदेश के बाद महिलाएं भी चबूतरे पर चढ़कर शनि देव की पूजा कर सकेंगी और उन्हें तेल चढ़ा सकेंगी।












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