जानिए राष्ट्र-भाषा, राज-भाषा और मातृ-भाषा में क्या अंतर है, हिंदी को लेकर क्या कहता है संविधान
लखनऊ, 28 अप्रैल। देश में राष्ट्रभाषा और राजभाषा को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। लंबे समय से यह बहस का मुद्दा रहा है। लेकिन बहुत कम लोग ऐसे हैं जिन्हें दोनों के बीच का अंतर पता है, जिसके चलते सोशल मीडिया पर इसको लेकर काफी बहस होती है। देश का संविधान इस पूरे मसले पर क्या कहता है इसको समझना काफी जरूरी है, जिसके बाद ही इस पूरे विवाद को समझा जा सकता है। भाषा की बात करें तो यह मुख्य रूप से दो तरह की होती है, एक औपचारिक और दूसरी अनौपचारिक भाषा। औपचारिक भाषा की बात करें तो यह सामान्य भाषा होती है, जिसे विद्यालय में इस्तेमाल किया जाता है, विशेष क्षेत्र में पढ़े-लिखे लोगों द्वारा स्वीकृत भाषा होती है। वहीं अनौपचारिक भाषा की बात करें तो यह वो भाषा होती है जिसे घर-परिवार के लोग, माता-पिता इस्तेमाल करते हैं, यह जन संचार के माध्यम की भी भाषा होती है। अनौपचारिक भाषा में मातृ भाषा, राष्ट्र भाषा, बोली, संपर्क भाषा आती है। इन तमाम भाषाओं को अनौपचारिक भाषा की श्रेणी में रखा जाता है। अब आइए समझते हैं कि राष्ट्र भाषा, राज भाषा और मातृ भाषा क्या होती है।

राष्ट्र भाषा क्या होती है
राष्ट्र भाषा की बात करें तो किसी भी देश में अधिकतर लोग जो भाषा बोलते हैं उसे राष्ट्र भाषा कहते हैं, चूंकि भारत में बड़ी आबादी हिंदी बोलती है, इसलिए उसे राष्ट्रभाषा कहते हैं। यही वजह है कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया है। गौर करने वाली बात है कि देश के संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है। हिंदी को संविधान में देश की राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया, चूंकि देश के अधिकतर लोग हिंदी बोलते हैं लिहाजा इसे स्वत: ही राष्ट्र भाषा का दर्जा प्राप्त हो गया है। राष्ट्रभाषा पूरे देश के संपर्क भाषा होती है,यानि जो लोगों को आपस में जोड़े, जो एक समाज को आपस में जोड़े, जो विभिन्न राज्यों को आपस में जोड़े। ऐसे में इसे ही राष्ट्र भाषा कहते हैं क्योंकि यह लोगों को जोड़ने का काम करती है। यह सामान्य बोलचाल की भाषा होती है, जिसके चलते इसे संपर्क भाषा भी कहते हैं। राष्ट्रभाषा का उपनाम लोक भाषा और लिंग्वा फ्रैंक भी कहते हैं।
क्या है राज भाषा
जिस भाषा का इस्तेमाल सरकारी कामकाज के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है उसे राज भाषा कहते हैं। देश के संविधान की धारा 343 (1) भाग 17 में हिंदी को राज भाषा कहा गया है। संविधान में कहा गया है कि हिंदी हमारे देश की राज भाषा होगी, इसका इस्तेमाल सरकारी कामकाज, प्रशासनिक कामकाज, व्यवसायिक काम में किया जाएगा। इसकी लिपी देवनागरी होगी। हिंदी को 14 सितंबर 1949 को राज भाषा घोषित किया गया। जिसके बाद 14 सितंबर को हर सा हिंदी दिवस मनाया जाता है। जबकि अंग्रेजी को सह राजभाषा का दर्जा दिया गया है। लिहाजा हिंदी हमारे देश की राष्ट्र भाषा भी है और राज भाषा भी है, लेकिन संविधान में सिर्फ राज्य भाषा का उल्लेख किया गया है राष्ट्रभाषा का नहीं।
क्या होती है मातृभाषा
जिस भाषा का प्रयोग हम जन्म लेने के बाद से इस्तेमाल करते हैं उसे मातृभाषा होती है। परिवार माता-पिता और बाकी के अन्य सदस्य जिस भाषा का प्रयोग करते हैं उसे मातृभाषा कहते हैं। इसमे मुख्य रूप से घर की बोली, क्षेत्रीय भाषा समाज द्वारा स्वीकृत भाषा आती है। ऐसी भाषा जिसके माध्यम से विशेष क्षेत्र का पढ़ा लिखा वर्ग विचार-विमर्श करता है उसे मातृभाषा कहते हैं। मातृ भाषा में बच्चों को शिक्षा देने के लिए इसलिए कहा जाता है क्योंकि बच्चा जब पहली शिक्षा हासिल करता है तो वह मातृभाषा में ही करता है। यही वजह है कि प्राथमिक स्तर पर शिक्षा का माध्यम मातृ भाषा होती है, यह शिक्षा ग्रहण करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माध्यम होता है।
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