IRCTC Parcel Booking: भारतीय रेलवे ने बदल दिया पार्सल बुकिंग के नियम, पहले और अब के रूल्स में है कितना अंतर?
IRCTC New Parcel Booking Rules: भारतीय रेल (Indian Railways) ने यात्रियों और पार्सल सेवा की सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब रेलवे के पार्सल बुकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और निगरानी को बढ़ाने के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। अब कोई भी व्यक्ति पार्सल बुक कराने जाएगा तो उसे अपनी पहचान बतानी अनिवार्य होगी। इस कदम का मकसद धोखाधड़ी और संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाना है।
पार्सल बुक कराने वाले व्यक्ति को अब पहचान पत्र की फोटो कॉपी और मोबाइल नंबर देना होगा। पहचान के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट में से कोई एक दस्तावेज दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, बुकिंग की जानकारी और सीसीटीवी फुटेज का रिकॉर्ड 30 दिनों तक सुरक्षित रखा जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर जांच में मदद मिल सके।

संदिग्ध पार्सल पर नजर
रेलवे ने निर्देश दिया है कि पार्सल में बुक किए जाने वाले सामान की जांच-पड़ताल भी होगी। जरूरत पड़ने पर डॉग स्क्वॉड की मदद से संदिग्ध पार्सलों की तलाशी ली जाएगी। रेलवे का मानना है कि इस कदम से पार्सल सेवा में पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी की घटनाओं पर रोक लगेगी।
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डेटा और सीसीटीवी फुटेज का रिकॉर्ड
बुकिंग डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज का रिकॉर्ड कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जांच में तुरंत मदद मिल सके। रेलवे का मानना है कि इन सख्त नियमों से धोखाधड़ी और सुरक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।
पुराने नियमों की प्रक्रिया
पहले पार्सल बुकिंग की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल थी। उस समय केवल "फॉरवर्डिंग नोट" भरने और रेलवे रसीद (RR) लेने की जरूरत होती थी। पार्सल की पैकिंग और वजन की जांच मौके पर की जाती थी। Broad Gauge पर अधिकतम 150 किलोग्राम वजन और 2.0×1.5×1.25 मीटर डाइमेंशन की सीमा निर्धारित थी।
चार स्केल के आधार पर चार्ज
पुराने नियमों में पार्सल की दरें चार स्केल - स्केल-R (राजधानी), स्केल-P (प्रीमियर), स्केल-S (स्टैंडर्ड) और स्केल-L (लगेज) - के आधार पर तय होती थीं।
अग्रिम बुकिंग और भुगतान
पार्सल स्पेस की अग्रिम बुकिंग भी संभव थी, जिसमें 120 दिन पहले स्लॉट बुक कर 10% राशि जमा करनी होती थी, और शेष 90% राशि यात्रा से 72 घंटे पहले जमा करनी होती थी।
प्रतिबंधित सामान
खतरनाक वस्तुएं जैसे एसिड, विस्फोटक, गैस सिलेंडर और मृत पक्षी पार्सल में भेजने पर पूरी तरह रोक थी।
समय पर पार्सल न लेने पर चार्ज
अगर समय पर पार्सल नहीं लिया जाता था, तो स्टेशन की श्रेणी के अनुसार डिमरेज और व्हार्फेज चार्ज लगाए जाते थे।
सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
अब नए नियमों में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है, जिससे पार्सल सेवा में पारदर्शिता बढ़े और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
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