इराक संकट तक सिमट जाती है बहस, कोई नहीं उठाता शिया-सुन्नी की ये 13 बातें
बेंगलोर। इराक संकट से पैदा हुए सवालों से ज्यादा जवाब आज इंसानियत और संप्रदाय के बीच दरार पैदा कर रहे हैं। बहुत आसान है कि 'शिया-सुन्नी' टकराव कहकर इराक के उग्रवादियों व सरकारी तंत्र पर चर्चा कर पन्ना पलट देना। आइए आज खोलें वो पर्तें जो सिर्फ धर्मगुरुओं के ग्रंथों में कैद हैं या फिर किसी 'कम्युनल' नेता की जुबान पर हैं।
दुनिया के मुसलमान 73 अलग-अलग फिरकों में बंटे हैं, जिनमें शिया और सुन्नी प्रमुख हैं। पैगंबर मुहम्मद साहब के जाने के बाद इन दोनों समुदायों ने अपने रास्ते अलग कर लिए और इनका शुरुआती विवाद इस बात को लेकर था कि अब कौन मुसलमानों का नेतृत्व करेगा। यह सब पिछले 1400 वर्षों से चला आ रहा है।
आज इराक संकट की डोर से बंधा हुआ है, जहां पर सुन्नियों का संगठन आईएसआईएस मुख्य रूप से शियाओं को निशाना बना रहा है। ऐसे में दोनों धड़ों से जुड़ी कुछ अहम बातें हैं जो आपको जरूर जाननी चाहिये।

साथ सदियों का
मुसलमानों में ज़्यादा संख्या सुन्नियों की है जो कुल मुस्लिम आबादी का 85 फ़ीसदी से 90 फ़ीसदी माने जाते हैं। दोनों ही समुदाय सदियों तक मिलजुल कर एक साथ रहे हैं लेकिन उनकी बुनियादी धार्मिक आस्थाएं और रीति रिवाज थोड़े अलग हैं।

नेताओं के बीच खाई
शादी की बात करें तो दोनों के बीच मतभेद पैदा होते रहे हैं। दोनों के सिद्धांत, अनुष्ठान, क़ानून, धर्मशास्त्र करीब-करीब अलग ही हैं। यही कारण है कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि दोनों धड़ों के धर्मगुरुओं के बीच एक खाई बन गई है।

सीरिया, इराक और पाक
सीरिया से लेकर इराक़ और पाकिस्तान तक कई देशों में हाल में दोनों समुदायों के बीच हिंसा देखने को मिली है और इससे उनमें मतभेदों की खाई और बढ़ी है।

सुन्नी परिचय
सुन्नी मुसलमान ख़ुद को इस्लाम की पुरातनपंथी और पारंपरिक शाखा समझते हैं। तालिबान सुन्नी गुट है तालिबान चरमपंथी कई बार शिया धार्मिक स्थलों को निशाना बनाते हैं।

सुन्नी का कर्तव्य
सुन्नी शब्द 'अह्ल-अल-सुन्ना' से आया है, जिसका अर्थ होता है परंपरा मानने वाले लोग। इस मामले में परंपरा का अर्थ है पैगंबर मोहम्मद या उनके क़रीबी लोगों की ओर से अस्तित्व में आई मिसालों और निर्देशों पर काम करना।

कौन हैं प्रमुख
क़ुरान में जिन सभी पैगंबरों का ज़िक्र है, सुन्नी उन सबको मानते हैं, लेकिन उनके लिए मोहम्मद अंतिम पैगंबर थे। उनके बाद जो भी मुसलमान नेता हुए, उन्हें सांसारिक हस्तियों की श्रेणी में रखा जाता है।

किसको मानें
क़ुरान में जिन सभी पैगंबरों का ज़िक्र है, सुन्नी उन सबको मानते हैं, लेकिन उनके लिए मोहम्मद अंतिम पैगंबर थे। उनके बाद जो भी मुसलमान नेता हुए, उन्हें सांसारिक हस्ती माना जाता है।

शिया परिचय
इस्लामी इतिहास के अनुसार शिया शब्द का शाब्दिक अर्थ है 'रोने वाला'। ये सुन्नियों के चौथे खलीफा और शियाओं के पहले इमाम हजरत अली को मानते हैं। शियाओं का अस्तित्व करबला की जंग के बाद आया।

शिया सुन्नी में टकराव
अरब में हजरत अली की खिलाफत के चलते उनके विरोधियों ने उनका कत्ल कर दिया था। उनके बेटे इमाम हुसैन युद्ध में मारे गए थे। जबकि हसन के बारे में माना जाता है कि उन्हें ज़हर दिया गया था। यह सब कुछ शिया-सुन्नी टकराव के चलते हुआ था।
वह टकराव आज भी चलाआ रहा है, जिसके परिणाम इराक में देखने को मिल रहे हैं।
संख्या का तकाजा
दुनिया के कुल सुन्नी मुसलमानों की 18 प्रतिशत संख्या शिया मुसलमानों की है।

क्या मिलता है बढ़ावा
वो ख़ुद को भेदभाव और दमन का शिकार मानते हैं। ऐसा कहते हैं कि कई सुन्नी चरमपंथी सिद्धांतों में शियाओं के ख़िलाफ़ नफरत को बढ़ावा दिया जाता है।

साजिश या पहल
ईरान की सरकार ने अपनी सीमाओं से बाहर शिया लड़ाकों और पार्टियों को समर्थन दिया जबकि खाड़ी देशों ने भी इसी तरह सुन्नियों को बढ़ावा दिया। इससे दुनिया में सुन्नी सरकारों और आंदोलन के साथ उनके संपर्क मज़बूत हुए।

मजबूती बनेगी कमजोरी
सीरिया और इराक़ में जारी संकट में शिया और सुन्नी विवाद की गूंज सुनाई देती है। इन दोनों ही देशों में युवा सुन्नी विद्रोही गुटों में शामिल हो रहे हैं। इनमें बहुत से लोग अल क़ायदा की कट्टरपंथी विचारधारा को मानते हैं। दूसरी ओर शिया सम्प्रदाय के कई लोग सरकार की ओर से या सरकारी सेनाओं के साथ मिलकर लड़ रहे हैं।












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