नैनो उर्वरक: कट्टे वाली खाद से ज़्यादा फ़ायदेमंद है बोतल वाली खाद, पढ़िए पूरी जानकारी
Rajneesh Pandey Interview: रबी की फसलों का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में इफको के उप प्रबंधक रजनीश पांडेय ने एक इंटरव्यू में अच्छी उपज के लिए मृदा के स्वास्थ्य, पर्यावरण की बेहतरी और उर्वरकों के संतुलित प्रयोग पर चर्चा की।
बातचीत के दौरान उन्होंने मृदा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। रजनीश पांडेय ने बताया कि कैसे डीएपी का पूरी तरह फसलों में उपयोग नहीं हो पाता है। चर्चा के दौरान उन्होंने नैनो तकनीकी के उर्वरकों पर जोर दिया।

रबी की फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए संतुलित खादों का प्रयोग जरूरी है। इसके लिए किसानों को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, बुआई करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और उर्वरकों के सही प्रयोग के जरिए मृदा और पर्यावरण प्रदूषण से कैसे बचा जा सकता है, इन्हीं सब विषयों को लेकर इफको के मुख्य प्रबंधक रजनीश पांडेय ने विस्तार से बात की।
मृदा के स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी काफी जरूरी
उन्होंने कहा कि 'कृषि के साथ-साथ हमारी मृदा के स्वास्थ्य, पर्यावरण की बेहतरी के लिए कि अहम बातों का ध्यान रखना जरूरी है।उर्वरकों के संतुलित प्रयोग पर जोर देते हुए इफको के डीजीएम रजनीश पांडेय ने कहा कि रबी की फसलों के बुवाई करते समय डीएपी के प्रयोग के बारे में जानना आवश्यक है।'

'शेष डीएपी पौधों की जड़ के पास जमीन जम जाता है'
उन्होंने कहा, " हमारे किसान भाई डीएपी 1350 रुपए प्रति कट्टा खरीदते हैं, जिसमें से मात्र 15% ही हमारी फसलों में घुलकर प्रयोग हो पाता है। जबकि शेष डीएपी पौधों की जड़ के पास जमीन जम जाता है। इसी प्रकार यूरिया की बात करें तो यूरिया का उपयोग दक्षता का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।"
'इफको ने नई तकनीक के उर्वरक की शुरुआत की'
इफको के उप प्रबंधक ने बताया कि यूरिया का अधिक प्रयोग पानी को प्रदूषित करता है और पर्यावरण में जाता है। उन्होंने कहा, हम जो खाद हम अपने खेत में डाल रहे हैं, हमें यह समझना पड़ेगा कि हम ज्यादा डाल रहे हैं लेकिन हमारी फसलों को कम प्राप्त हो रहा है। इन्ही सब बात को ध्यान में रखते हुए इफको ने नई तकनीक के उर्वरक की शुरुआत की। जिसका नैनो तकनीक से निर्माण किया गया।
'उपयोग दक्षता बहुत कम थी'
पांडेय ने बताया कि नैनो टेक्नोलॉजी को लेकर रिसर्च में पाया गया कि जिस भी क्षेत्र में इस प्रौद्योगिकी पर आधारित उत्पादों का प्रयोग हुआ है, वहां एक बहुत बड़ी क्रांति आई है। हमारे उर्वरकों में सबसे बड़ी समस्या यही थी कि उपयोग दक्षता बहुत कम थी। जिसके कारण केमिकल का प्रयोग खेतों में होने लगा।
नैनो उर्वरकों की 90 प्रतिशत उपयोग दक्षता
इफको के डीजीएम ने कहा कि फसलों में उर्वरकों की दक्षता बढ़ाना अब जरूरी हो गया है। इसके लिए इफको ने नैनो तकनीकी आधारित नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उत्पादन किया है। इसका प्रयोग अन्य उर्वरकों की तुलना में कम मात्रा में ही करके अधिक उपज ली जा सकती है। इफको के डीजीएम के मुताबिक, नैनो उर्वकरों की उपयोग दक्षता 90% तक है।
इफको के उप प्रबंधक रजनीश पांडेय ने कहा कि किसान आम तौर पर फसलों के लिए जितनी मात्रा में नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, उससे अधिक मात्रा में नाइट्रोजन का प्रयोग करते हैं। जबकि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के माध्यम से नाइट्रोजन और फॉस्फेट की मांग कम उर्वरक के प्रयोग से ही पूरी हो जाती है। ऐसे में फसलों की बुआई के समय में फास्फेट की जगह अगर नैनो डीएपी का प्रयोग किया जाए तो फसलें बेहतर विकास करेंगी और उपज में वृद्धि होगी।












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