भारत में लैंगिक समानता- टॉयलेट नहीं होने के कारण स्कूल छोड़ देती हैं 60% लड़कियां
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन एक रिपोर्ट आयी जिसके अनुसार लैंगिक समानता के पैमाने पर भारत बांग्लादेश से भी पीछे है। वैसे है तो यह शर्मनाक, क्योंकि हम हर रोज महिलाओं को बराबर का हक देने की बात करते हैं! शायद यह जानकार अब आप चौंक जायेंगे कि भारत की 60 फीसदी लड़कियां सिर्फ इसलिये स्कूल जाना छोड़ देती हैं, क्योंकि वहां टॉयलेट नहीं।
जी हां ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार छोटी-छोटी बच्चियां सिर्फ इसलिये स्कूल जाना छोड़ देती हैं, या फिर उनके माता-पिता स्कूल भेजना बंद कर देते हैं, क्योंकि स्कूल में शौचालय नहीं है। कहीं शौचालय है तो दरवाजा नहीं और दरवाजा है, तो स्वच्छता नहीं। ऐसी लड़कियों का आंकड़ा 60 फीसदी है।
अब अगर एशिया प्रशांत एपीएसी की रिपोर्ट पर गौर करें तो लैंगिक समानता में भारत बांग्लादेश और श्रीलंका से पीछे है। मास्टरकार्ड के एक सर्वे के अनुसार भारत 44.2 अंकों के साथ आखिरी पायदान पर रहा। वहीं बांग्लादेश 44.6 और श्रीलंकर 46.2 अंकों से थोड़ा ऊपर।
वहीं सबसे आगे न्यूजीलैंड है, जिसके अंक 77 हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया 76 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर, फिलीपींस 72.6 अंकों के साथ तीसरे और सिंगापुर 70.5 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे। यह रिपोर्ट 2014 में हुए सर्वे की है।
महिलाओं से जुड़ी कुछ खास बातें जो एनसीआरबी व अन्य रिपोर्ट से मिलीं
- भारत में 25 वर्ष से अधिक आयु वाली कुल वर्कफोर्स की 29 प्रतिशत महिलाएं हैं।
- भारत में कृषि एवं छोटे उद्योगों की कुल वर्कफोर्स में 89.5 प्रतिशत महिलाएं हैं।
- भारत में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में 95 प्रतिशत योगदान महिलाओं का होता है।
- वनों से संबंधित क्षेत्रों में कुल वर्कफोर्स की 51 प्रतिशत महिलाएं काम करती हैं।
- गरीबी रेखा के नीचे 35% परिवारों खर्च महिलाएं उठाती हैं।
- गरीबी रेखा के ऊपर 9.2 परिवारों का खर्च महिलाएं उठाती हैं।
- 47% लड़कियों की शादी 22-24 साल की उम्र के बीच होती है।
- भारत में 70 फीसदी महिलाएं गंभीर घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं।
- भारत में महिला हिंसा पर हर साल 3 लाख से ज्यादा मामले थाने में दर्ज होते हैं।
- भारत में हर साल 33 हजार से ज्यादा महिलाओं के साथ बलात्कार होता है।
- भारत में हर साल 70 हजार से ज्यादा महिलाओं को जानबूझ कर बेइज्जत किया जाता है।
- भारत में हर साल 1.18 लाख महिलाएं अपने पति या रिश्तेदारों द्वारा प्रताड़ित की जाती हैं।
- भारत में हर साल 51 हजार से ज्यादा महिलाओं या बच्चियों का अपहरण किया जाता है।













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