INS Trishul: समुंदर के अंदर भारत की पॉवर, वो हथियार जिससे कांपे लुटेरे, कैसे बचे 23 पाकिस्तानी? जानिए सबकुछ
भारतीय नौसेना ने अरब सागर में घंटों तक चले ऑपरेशन के बाद 23 पाकिस्तानी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला। 12 घंटे ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना की ताकत के आगे सोमालिया से आए समुद्री लुटेरों को घुटने टेकने को मजबूर होना पड़ा। ऑपरेशन पूरा होने के बाद एक बयान में नौसेना ने ऑपरेशन की जानकारी देते हुए कहा कि युद्धपोत आईएनएस सुमेधा के साथ समुद्री लुटेरों से पाकिस्तानी नागरिकों को बचाने के लिए ऑपरेशन शुरू किया गया था।
भारतीय नौसेना ने शुक्रवार एक बयान जारी किया, जिसमें अरब सागर में 12 घंटे तक चले ऑपरेशन की जानकारी दी। नेवी ने कहा कि अरब सागर में 12 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद 23 पाकिस्तानी नागरिकों को सोमाली समुद्री लुटेरों से बचाया, जिसमें जहाज पर सवार समुद्री लुटेरों को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

नेवी ने ऑपरेशन का ब्योरा देते हुए कहा कहा, "युद्धपोत आईएनएस सुमेधा ने 29 मार्च 24 के शुरुआती घंटों के दौरान एफवी अल-कंबर को रोका और बाद में निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल से जुड़ गया। मछली पकड़ने की सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए उसे सुरक्षित क्षेत्र में ले जाने के लिए भारतीय नौसेना विशेषज्ञ टीमें वर्तमान में एफवी की योग्यता जांच कर रही हैं।"
नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सुमेधा ने शुक्रवार तड़के मछली पकड़ने वाले जहाज अल-कमर को रोका और बाद में गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल को भी इसमें जोड़ा गया।
इंडियन नेवी ने साफ कहा है कि भारतीय क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीयता के बावजूद नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले 28 मार्च की देर शाम ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज 'अल कमर 786' पर संभावित समुद्री लूट की घटना के इनपुट के आधार पर, समुद्री सुरक्षा अभियानों के लिए अरब सागर में तैनात दो भारतीय नौसेना जहाजों को अपहृत मछली पकड़ने वाले जहाज को रोकने के लिए डायवर्ट किया गया था। ऑपरेशन के वक्मत छली पकड़ने वाला जहाज सोकोट्रा से लगभग 90 एनएम दक्षिण-पश्चिम में था और बताया गया था कि उस पर नौ सशस्त्र समुद्री डाकू सवार थे। लुटेरों के चंगुल से जहाज को 29 मार्च छुड़ाया गया था।












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