भारतीयों को लाने के लिए नौसेना ने रवाना किए अपने 3 सबसे बड़े जहाज, जानिए इनके बारे में सबकुछ

नई दिल्‍ली। इंडियन नेवी ने कोरोना वायरस महामारी के बीच ही संंयुक्‍त अरब अमीरात (यूएई) और मालदीव में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए तीन जहाज रवाना किए हैं। आईएनएस जलाश्‍व, आईएनएस मगर और आईएनएस शार्दुल को नौसेना ने अलग-अलग दिशाओं में रवाना किया है। आईएनएस जलश्‍व और आईएनएस मगर सोमवार रात मालदीव के लिए निकले हैं तो वहीं आईएनएस शार्दुल को दुबई के लिए रवाना किया गया है। नेवी के प्रवक्‍ता की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है। तीनों जहाज कोच्चि लौटकर आएंगे। जहां आईएनएस मगर और आईएनएस शार्दुल दक्षिण नौसेना कमान में तैनात हैं तो वहीं आईएनएस जलश्‍व पूर्वी नौसेना कमान में तैनात हैं।

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    अमेरिका से खरीदा गए INS जलाश्‍व पर आ सकते हैं 1000 लोग

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    आईएनएस जलाश्‍व एक ट्रांसपोर्ट जहाज है और इसे नेवी के सबसे बड़े जहाज के तौर पर गिना जाता है। आईएनएस जलाश्‍व को अमे‍रिका से लिया गया है और इसे यूएसएस ट्रेनटॉन के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिका ने आईएनएस जलाश्‍व के साथ छह सी किंग हेलीकॉप्‍टर्स को भारत के लिए निर्मित किया था। भारत ने साल 2005 में 90 मिलियन डॉलर की लागत से इसे खरीदा था और साल 2007 में यह नेवी में कमीशंड हुई थी। आईएनएस जलाश्‍व पहला और इकलौता जहाज है जिसे अमेरिका से खरीदा गया था। फिलहाल इसका बेस ईस्‍टर्न नेवी कमांड विशाखापट्टनम में है। आईएनएस जलाश्‍व के फ्लाइट डेक पर छह से ज्‍यादा मीडियम हेलीकॉप्‍टर्स को ऑपरेट किया जा सकता है। इस जहाज पर 1,000 लोगों की क्षमता है और यह पूरी तरह से मेडिकल सुविधाओं से लैस है। इसमें चार ऑपरेशंस थियेटर्स, 12 बेड वॉर्ड, एक लैब और एक डेंटल सेंटर है।

    देश में बना INS मगर

    देश में बना INS मगर

    आईएनएस मगर नेवी का वह एक ऐसा जहाज है जो पूरी तरह से देश में बना है। कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्‍डर्स एंड इंजीनियर्स की तरफ से इसका निर्माण किया गया था। 15 जुलाई 1987 को मगर नेवी में शामिल हुआ। इस जहाज ने श्रीलंका में भारतीय सेना की तरफ से चलाए गए ऑपरेशन पवन में हिस्‍स्‍सा लिया था। अप्रैल 2018 में मगर का बेस बदल दिया गया और यह इंडियन नेवी के ट्रेनिंग कमांड कोच्चि आ गई। आईएनएस मगर करीब 79 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से समंदर में चल सकता है। इस जहाज में 15 टैंक आसानी से आ सकते हैं। यह कई प्रकार के हथियारों से भी लैस है जिसमें नेविगेशन रडार के अलावा बोफोर्स 40 एमएम गन और दो मल्‍टीपल बैरल रॉकेट लॉन्‍चर्स हैं। इस जहाज पर एक सी किंग हेलीकॉप्‍टर आसानी से ऑपरेट कर सकता है।

    INS शार्दुल ने की मेडागास्‍कर की मदद

    INS शार्दुल ने की मेडागास्‍कर की मदद

    आईएनएस शार्दुल नौसेना का एक और स्‍वदेशी जहाज है। इस जहाज की क्षमता 500 लोगों की है। ट्रूप्‍स के अलावा इस पर 11 ऑफिसर्स और 145 जवान तैनात रहते हैं। तीन अक्‍टूबर 2008 को यह नेवी में कमीशंड हुआ था। आईएनएस शार्दुल को मार्च 2017 में हिंद महासागर के दक्षिण में तैनात किया गया था। उस समय इसका डेप्‍लॉयमेंट इस क्षेत्र पर निगरानी के लिए किया गया था। 10 मार्च 2020 को आईएनएस शार्दुल राहत सामग्री लेकर मेडागास्‍कर रवाना हुआ था। मेडागास्‍कर में आए तूफान और बाढ़ के बाद आईएनएस शार्दुल ने बड़ी भूमिका अदा की थी। इस जहाज के जरिए करीब 600 टन चावल मेडगास्‍कर को दी गई थी। यह अब तक की सबसे बड़ी राहत सामग्री थी जिसे नौसेना के किसी वॉरशिप के जरिए भेजा गया था।

    इंडियन नेवी की 14 वॉरशिप्‍स रेडी

    इंडियन नेवी की 14 वॉरशिप्‍स रेडी

    विदेशों में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए लॉन्‍च किए गए ऑपरेशन को इंडियन नेवी ने 'ऑपरेशन समुद्र सेतु' लॉन्‍च किया है। इंडियन नेवी की तरफ से बताया गया है कि खाड़ी और अन्य देशों से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए कुल 14 वॉरशिप्‍स को रेडी रखा गया है। आईएनएस शार्दुल अपनी भारतीयों को कोच्चि लाएगा।सरकार का कहना है कि मालदीव में करीब 2500 से अधिक भारतीय मजदूर फंसे हुए हैं, जिन्हें वापस लाना है। अब इन्हें समुद्री रास्ते के जरिए ही वापस लाया जाएगा।

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