मंगल की सतह पर Ingenuity Helicopter की उड़ान, NASA ने शेयर किया अद्भुत Video

नासा ने मंगल की सतह पर 47वीं उड़ान भरने के इंजन्यूटी हेलीकॉप्टर का एक वीडियो जारी किया है। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में इस टेक्नोलॉजी को काफी सराहा जा रहा है और यह भविष्य के मिशन के लिए काफी उपयोगी है।

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पृथ्वी से मंगल ग्रह की मौजूदा दूरी 196.9 मिलियन किलोमीटर या करीब 19.69 करोड़ किलोमीटर के बराबर है। इतनी दूरी पर कोई हेलीकॉप्टर टेकऑफ कर रहा है और उसकी लैंडिंग हो रही है, उसका वीडियो हम देख पा रहे हैं तो यह विज्ञान का ही चमत्कार है। नासा ने एक ऐसा ही वीडियो साझा किया है, जो हाल ही का है। इसमें इंजन्यूटी मार्स हेलीकॉप्टर 47वीं उड़ान भरते नजर आ रहा है। जबकि इस हेलीकॉप्टर की तय की गई आयु कब की समाप्त हो चुकी है। नासा के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि दूसरे ग्रह पर टेकऑफ और लैंडिंग के हम कुछ और भी अद्भुत वीडियो देखने वाले हैं।

मंगल पर हेलीकॉप्टर का टेकऑफ

मंगल पर हेलीकॉप्टर का टेकऑफ

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इंजन्यूटी मार्स हेलीकॉप्टर का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह लाल ग्रह की सतह पर टेकऑफ करता नजर आ रहा है। यह इसकी 47वीं उड़ान है, जिसके चलते टेकॉफ के दौरान मंगल की सतह पर धूल उड़ते देखा जा सकता है। इस वीडियो में आवाज तो नहीं है, लेकिन इससे पता चलता है कि इंसान इंजीनियरिंग की दुनिया में कितना सक्षम हो गया है कि पता ही नहीं चलता कि नजरा धरती के किसी कोने का है या फिर हमसे करोड़ों किलोमीटर दूर सौर मंडल के किसी दूसरे ग्रह का।

146 सेकंड की उड़ान

146 सेकंड की उड़ान

9 मार्च को अपनी 47वीं उड़ान में इंजन्यूटी हेलीकॉप्टर ने 1,443 फीट या 440 मीटर की दूरी तय की। इस दौरान यह 146 सेकंड तक मंगल की सतह के ऊपर चक्कर काटता रहा। ऑपरेशन के दौरान इसकी अधिकतम ऊंचाई 40 फीट या 12 मीटर तक रही। जिस दौरान पर्सिवरेंस मार्स रोवर मंगल की पथरीली सतह पर धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक आगे बढ़ रहा था, इंजन्यूटी सतह से ऊपर वैज्ञानिक लक्ष्यों को पूरा कर रहा है और संभावित रास्तों का अवलोकन कर रहा था।

वैज्ञानिकों की खोज का दायरा बढ गया है

वैज्ञानिकों की खोज का दायरा बढ गया है

अप्रैल 2021 की बात है जब इंजन्यूटी ने इस वजह से सुर्खियां बटोरी थी कि यह दूसरे ग्रह पर उड़ान भरना वाला पहली पावर्ड, कंट्रोल्ड यान बना था। यह इस तरह से डिजाइन किया गया कि दूसरे ग्रह पर भी इसे उड़ाना और लैंड कराना संभव हो। इस तरह से वैज्ञानिकों को वहां के बारे में पता लगाने के लिए उपकरणों का दायरा बढ़ जाता है। एक तो रोवर सतह पर चलकर तथ्य और सैंपल जुटाता है तो दूसरा फ्लाइट के जरिए ज्यादा विशाल लैंडस्केप का अंदाजा मिल पाता है।

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    अपनी उम्र से ज्यादा काम कर रहा है ये हेलीकॉप्टर

    अपनी उम्र से ज्यादा काम कर रहा है ये हेलीकॉप्टर

    बड़ी बात ये है कि इस हेलीकॉप्टर को वैज्ञानिकों ने जितनी संभव फ्लाइट के लिए डिजाइन किया था, उससे कहीं ज्यादा तो यह उड़ान भर चुका है। इस सफलता से भविष्य में ऐसे मिशनों के लिए नया रास्ता खुला है। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मंगल की तरह दूसरे ग्रहों के बारे में जानने-समझने के लिए भी किया जा सकता है। 18 मार्च तक यह हेलीकॉप्टर 48वीं उड़ान भरने की भी कोशिश करेगा। इस दौरान इसके उत्तर-पश्चिम दिशा में 1,271.7 फीट या 387.6 मीटर उड़ान भरने की उम्मीद है और वैज्ञानिकों को इसके माध्यम से कुछ नई तस्वीरें प्राप्त करने की आशा भी है।

    नासा ने जारी किया है ये वीडियो

    नासा पर्सिवरेंस मार्स रोवर ने ट्विटर पर 47वीं उड़ान की सफलता पर लिखा है, 'और ऐक्शन! मेरा ताजा वीडियो देखिए...मार्स हेलीकॉप्टर धूल उड़ाते हुए और फ्लाइट47 टेकऑफ करते हुए। इस प्वाइंट पर इंजन्यूटी 'वारंटी' से काफी आगे हो चुका है, लेकिन हमारे साथ घूम रहा है, जबतक हम साथ-साथ ऊपर की ओर बढ़ते हैं, तब तक इसे बनाए रखना।'

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