राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: राजस्थान में पायलट और गहलोत गुट की लड़ाई में वसुंधरा को मिल सकता है फायदा
नई दिल्ली। राजस्थान कांग्रेस ने यह महसूस करना शुरु कर दिया है कि इस साल होने वाले चुनावों से पहले पार्टी के अंदर की गुटबाजी उनके लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। कांग्रेस के दोनों गुटों अशोक गहलोत और सचिन पायलट गुट के कार्यकर्ता एक दूसरे को दोष दे रहे हैं। यही कारण है कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरी आजादी के साथ काम करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। अंदरूनी कलह कांग्रेस की चीजों को और मुश्किल बना रही है।

सीएम पद के लिए दोनों में लगी होड़
राजस्थान में चुनाव मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के साथ नवंबर में कभी भी आयोजित किए जा सकते हैं, लेकिन अंदरूनी कलह राजस्थान में पार्टी की संभावनाओं को खराब कर सकती है। प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के गुट से जुड़े कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ग्रुप के कार्यकर्ता उन्हें काम करने की इजाजत नहीं दे रहे हैं। दोनों समूह मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा मजबूत करने के लिए इन चुनावों में अधिक से अधिक क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे हैं। राजस्थान कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि राज्य में कांग्रेस के शीर्ष दो नेताओं के कार्यकर्ता के बीच अंदरूनी कलह राज्य में कांग्रेस की संभावनाओं को खत्म सकती है। पार्टी के कुछ लोग योजना बना रहे हैं कि कांग्रेस हाईकमान समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप करें।

सीएम उम्मीदवार घोषित ना करना महंगा पड़ सकता है कांग्रेस को
इसके विपरीत राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। बीजेपी फिर से संभावनाएं तलाशने लगी हैं। यही कारण है कि उन्होंने एक बहुत ही आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। इससे पहले कांग्रेस हाईकमांड ने राजस्थान नेताओं पर एक आदेश जारी किया था। केंद्रीय नेतृत्व ने बिना किसी को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पेश किए राजस्थान विधानसभा चुनावों में अशोल गहलोत, सचिन पायलट, सीपी जोशी और भंवर जितेंद्र सिंह सहित सभी वरिष्ठ राज्य के नेताओं के संयुक्त नेतृत्व में चुनाव लड़ाने का ऐलान किया था। लेकिन यह राज्य के पार्टी कार्यकर्ताओं के ठीक नहीं रहा। वे राज्य में नेता की पसंद के बारे में अधिक मुखर हो गए हैं।

राजे इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश में हैं
पिछले हफ्ते जयपुर में आयोजित चुनाव प्रबंधन पर एकदिवसीय कार्यशाला में अंदरूनी कलह स्पष्ट हो गया। पायलट और गहलोत के समर्थक अप्रत्यक्ष रूप से एक-दूसरे के खिलाफ हमला कर रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री अपने बीजेपी राज्य अध्यक्ष के साथ मिलकर मतदाताओं को अपनी ओर मोड़ने की कोशिश कर रही हैं। विषलेश्कों का कहना है कि, अगर सीएम सत्ताविरोधी लहर के कम करने में सफल होती हैं तो वह कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी का फायदा उठाने में सफल हो सकती हैं। कांग्रेस के वोट बैंक को अपनी ओर मोड़ सकती हैं।












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