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इंदौर पेयजल कांड: उमा भारती ने उठाए सवाल, मंत्री और महापौर से इस्तीफे की मांग

इंदौर में भागीरथपुरा में पीने के पानी में प्रदूषण से संकट, जिससे तेज राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई। मेयर पुष्पमित्र भार्गव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछे गए, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जवाबदेही और इस्तीफों की मांग की। जनता और सोशल मीडिया पारदर्शिता और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हो रही मौतों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस बीच स्थानीय विधायक और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बयानों पर सियासी घमासान तेज हो गया है। जनता की सहानुभूति पाने के लिए दोनों नेताओं द्वारा यह कहना कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते, अब उनके लिए ही उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस पूरे मामले में खुलकर सवाल उठाए हैं और जिम्मेदारी तय करते हुए मंत्री और महापौर से इस्तीफे की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

Indore Water Crisis Scrutiny of Officials

भागीरथपुरा मामले में हालात की समीक्षा और समाधान के लिए अपर मुख्य सचिव संजय दुबे इंदौर पहुंचे। बैठक के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मीडिया से कहा कि उन्होंने अपर मुख्य सचिव के सामने अपनी बात खुलकर रखी है और यहां तक कहा कि ऐसे सिस्टम में काम करना मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी दी जाए। इस बयान को महापौर द्वारा खुद को असहाय और लाचार दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

इंदौर के प्रभावशाली नेता और राज्य सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी पहले कई बार अधिकारियों के रवैये को लेकर असंतोष जता चुके हैं। उन्होंने यह तक कहा कि अधिकारी उनकी भी नहीं सुनते, जबकि यह मामला उनके ही विभाग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

उमा भारती का तीखा प्रहार

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि इंदौर में दूषित पानी के मामले में यह कहना कि "हमारी नहीं चली", जिम्मेदारी से बचने जैसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनप्रतिनिधियों की नहीं चल रही थी तो वे पद पर बने रहकर सुविधाएं क्यों लेते रहे और जनता के बीच क्यों नहीं उतरे। उमा भारती ने लिखा कि ऐसे मामलों में न तो कोई स्पष्टीकरण होता है और न ही बहाना, बल्कि या तो प्रायश्चित होना चाहिए या दंड।

सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा

इस प्रकरण में महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सीधे तौर पर जनता के निशाने पर हैं। सोशल मीडिया पर लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं और तीखी टिप्पणियां कर रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि जब उपलब्धियों और पुरस्कारों की बात आती है तो जिम्मेदारी ली जाती है, लेकिन संकट के समय खुद को असहाय बताना स्वीकार्य नहीं है। जनता यह भी पूछ रही है कि यदि जिम्मेदारी निभा पाना संभव नहीं है तो पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा क्यों नहीं दिया जाता। पेयजल कांड को लेकर बढ़ते जनआक्रोश के बीच अब निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने के कदमों पर टिकी हैं।

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