ये हार कभी भी याद नहीं रखना चाहेंगे नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
16 साल तक सुप्रीम कोर्ट में वकील रहने के बाद रामनाथ कोविंद को बीजेपी ने पहली बार उन्हें 1991 में घाटमपुर से लोकसभा का टिकट दिया था। कोविंद यह चुनाव हार गए थे।
नई दिल्ली। बीजेपी नेता और बिहार के पूर्व गवर्नर रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति चुन लिया गया है। कोविंद ने 65.65 प्रतिशत वोटों के साथ यूपीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार मीरा कुमार को दोगुने वोटों के अंतर से हराया है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में सर्वोच्च पद पर बैठना वाकई सुखद अनुभूति है, लेकिन रामनाथ कोविंद का राजनीतिक जीवन इतना आसान नहीं रहा। चुनावी राजनीति उन्हें कभी रास नहीं आई। उन्होंने जब पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, तो करीब 50,000 वोटों से उन्हें हार मिली थी। इसके बाद 2007 में जब वह विधानसभा चुनाव लड़े तो प्रचंड राम लहर के बाद भी तीसरे स्थान पर रहे थे।
मीरा कुमार को दोगुने वोटों के अंतर से हराया

पहला लोकसभा चुनाव, बुरी तरह हारे थे कोविंद
16 साल तक सुप्रीम कोर्ट में वकील रहने के बाद रामनाथ कोविंद को बीजेपी ने पहली बार उन्हें 1991 में घाटमपुर से लोकसभा का टिकट दिया था। कोविंद यह चुनाव हार गए थे। घाटमपुर की लोकसभा सीट आरक्षित थी, जिस पर जनता दल के केशरी लाल 1,39,560 वोटों के साथ पहले नंबर पर रहे, जबकि रामनाथ कोविंद 95,913 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे। 90 के दशक के शुरुआती दौर में बीजेपी के पास एक से बढ़कर एक सवर्ण नेता थे, लेकिन दलित नेताओं की कमी थी। रामनाथ कोविंद ऐसे में पार्टी को बेहतर विकल्प लगे और उन्हें 1993 में राज्यसभा भेज दिया गया। पार्टी ने 1999 में एक बार फिर कोविंद को राज्यसभा भेजा। राज्यसभा में दूसरा कार्यकाल खत्म होने के बाद पार्टी ने एक बार कोविंद को सक्रिय राजनीति में उतारने का निर्णय लिया।
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विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे थे कोविंद
2007 में पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन इस बार भी उनके हाथ हार ही लगी। 2007 के विधानसभा चुनाव में कोविंद 26,549 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे। बसपा के टिकट पर लड़े रघुनाथ प्रसाद ने 36,829 वोटों के साथ चुनाव जीता था, जबकि सपा के टिकट पर लड़ीं अरुण कुमारी 33,731 वोट प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रही थीं।

वो हार अब याद नहीं रखना चाहेंगे नव-निर्वाचित राष्ट्रपति
भोगनीपुर विधानसभा और घाटमपुर लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार को आज रामनाथ कोविंद याद नहीं करना चाहेंगे। बहरहाल, ये तो पुरानी है, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद को कुल 7 लाख 2 हजार 44 वोट मिले, जबकि मुकाबले में खड़ीं मीरा कुमार को 3 लाख 67 हजार 314 वोट ही पा सकीं। अब ऐसी जीत के बाद भला कोई पुरानी हार याद करे भी तो क्यों?












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