Survey: स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के बावजूद शहरवासियों से ज्यादा स्वस्थ हैं भारत के गांव वाले
नई दिल्ली। चौंकियें मत..स्वास्थ्य सेवाओं से लगातार जूझ रहे भारत के गांव वालों के लिए एक बड़ी ही कमाल की बात सामने आयी है कि गांव के लोग शहरवासियों से कहीं ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। यह बात भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा किए गए हालिया सर्वे में साबित हुई है।

आईये जानते हैं इस सर्वे की खास बातें..
- सर्वे में साफ कहा गया है कि गांव के लोग शहरवालों की तुलना में ज्यादा स्वस्थ रहते हैं।
- यह सर्वे कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने करवाया है।
- इस सर्वे में करीब 15 दिन तक शहरी और ग्रामीणजीवन पर नजर रखी गयी।
- जिनमें शहर के 12 प्रतिशत लोग अपीन छोटी-छोटी बीमारियों को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे जबकि गांव के मात्र 9 प्रतिशत लोग ही बीमार पड़े।
- इस सर्वे में यह बात भी निकलकर सामने आयी कि गांव के 86 प्रतिशत और 82 प्रतिशत शहरी लोगों बिना किसी हेल्थ सपोर्ट के रह रहे हैं।
- बिना भर्ती हुए गांव के किसी रोगी का औसत चिकित्सा व्यय 509 रूपये था तो वहीं शहर में औसत चिकित्सा व्यय 639 रूपये बताया गया है।ट
- गांव के 58 प्रतिशत लोग प्राईवेट अस्पताल की शरण लेते हैं जबकि शहरों में 68 प्रतिशत लोग निजी अस्पताल को चुनते हैं।
- प्राईवेट डाक्टर दोनों ही जगह के लोगों के लिए मायने रखते हैं।
- सरकारी अस्पतालों के मुकाबले निजी अस्पतालों में इलाज का ख़र्च लगभग चार गुना ज़्यादा होता है
- अन्य भारतीयों के मुकाबले मलयाली ज्यादा बीमार होते हैं।
- गांव के लोग शारीरिक श्रम शहरवासियों की तुलना में ज्यादा करते हैं जो कि एक बहुत बड़ा कारण है उनके कम बीमार पड़ने का।
- सर्वे में ग्रामीणों के हेल्दी लाइफ के पीछे प्रदूषण मुक्त वातावरण, मानसिक दवाब कम होने का कारण बताया गया है।
- जबकि गांव को लोगों की बीमारी का कारण गंदगी और दूषित पानी को बताया गया है।












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