रेलवे ने आम लोगों के लिए खोले VIP सैलून, मिलेंगी लग्जरी होटल जैसी सुविधाएं
नई दिल्ली। रेलवे के वीआईपी सैलून को अब तक रेल अधिकारियों और मंत्रियों की शाही सवारी माना जाता था लेकिन अब रेलवे ने इसे अपने आम लोगों के लिए खोल दिया है। शुक्रवार को ऐसा ही एक सैलून 6 मुसाफिरों को लेकर दिल्ली से कटरा के लिए रवाना हुआ। आईआरसीटीसी ने इस तरह की पहली सेवा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से शुरू की है। इस शाही सैलून में सफर करने के लिए सैलून का किराया उस रूट पर AC1 के किराए से 18 गुना अधिक रखा गया है। अधिकारियों के इस्तेमाल में आने वाले सैलून को बंद करने पर रेलवे में लंबे समय से बहस चल रही थी। इसलिए आपातकालीन जरूरतों के लिहाज से कुछ सैलून को छोड़कर रेलवे ने बाक़ी सलून को आम लोगों के इस्तेमाल लिए खोल दिया है।

अभी 10 सैलून को आम जनता के लिए खोले गए
रेलवे ने अभी 10 सैलून को आम जनता के लिए खोले गए हैं। सैलून की बुकिंग की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। निजी यात्री द्वारा जम्मू मेल में बुक कराया गया पहला सैलून वैष्णो देवी कटरा की यात्रा पर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से रवाना किया गया।

6 पैसेंजरों के लिए 2 लाख रुपये में बुक हुआ सैलून
इसे 6 पैसेंजरों के लिए 2 लाख रुपये में बुक करवाया गया। 4 दिन की ट्रिप 30 मार्च से 2 अप्रैल को दिल्ली आकर खत्म होगी। एक बुकिंग में रेलवे के लून में अधिकतम 18 लोग यात्रा कर सकते हैं।

रेलवे के ये लक्जरी सैलून अंग्रेजों के जमाने के हैं
रेलवे के ये लक्जरी सैलून अंग्रेजों के जमाने के हैं, जिनमें ड्राइंग, डाइनिंग, किचन और दो बेडरूम होते हैं। इस तरह के खास डिब्बों को सैलून कहा जाता है। इसमें हर एक बेडरूम में अटैच्ड टॉयलेट-बाथरूम होते हैं। रेल लाइन पर यह चलते-फिरते लग्जरी होटल की तरह होते हैं।

हर रूम में अटैच बाथरूम की सुविधा
अटैच बाथरूम में गर्म और ठंडा पानी उपलब्ध है। इसके अलावा लिविंग कम डाइनिंग रूम, किचन, रिअर विंडो भी हैं। सलून को बेहतर लुक देने के लिए इसके विंडो का साइज बड़ा रखा गया है। रंग-बिरंगे परदे लगाए गए हैं। एक डिब्बे में दो परिवार सफर कर सकेंगे।

हर कोच में एक एसी अटेंडेंट और हेल्पर मिलेगा
आईआरसीटीसी ने बताया, 'इसमें किसी लग्जरी होटल की तरह सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रशिक्षित स्टाफ भी मौजूद होगा। इसके अलावा हर कोच में एक एसी अटेंडेंट और हेल्पर भी होगा, ताकि यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत न हो। देश के सभी रेलवे जोन में मौजूद सैलून को मिलाकर ऐसे कुल 336 कोच हैं जिनमें से 62 वातानुकूलित हैं।












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