Indian Railways: कर्मचारियों के सम्मान पर 'घोटाले' की गाज! रेलवे ने छीना रिटायरमेंट का सबसे बड़ा तोहफा
Indian Railways: भारतीय रेलवे के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने सेवानिवृत्ति (Retirement) की दहलीज पर खड़े हजारों कर्मचारियों को मायूस कर दिया है। दशकों से चली आ रही एक सम्मानजनक परंपरा को रेलवे बोर्ड ने एक झटके में खत्म कर दिया है।
अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की विदाई पर उन्हें वह चमकता हुआ 'गोल्ड प्लेटेड' चांदी का मेडल नहीं मिलेगा, जो उनकी सालों की मेहनत और सेवा का प्रतीक माना जाता था। रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा द्वारा 28 जनवरी 2026 को जारी किए गए इस आदेश ने पूरे महकमे में हलचल मचा दी है।

विदाई के तोहफे पर 'घोटाले' की मार
इस ऐतिहासिक परंपरा के अचानक खत्म होने के पीछे कोई प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक शर्मनाक 'सिक्का घोटाला' बड़ी वजह बना है। दरअसल, भोपाल मंडल में रिटायरमेंट के दौरान दिए गए मेडलों की जब बारीकी से जांच हुई, तो सच्चाई चौंकाने वाली निकली। जिन मेडलों को चांदी का बताकर कर्मचारियों को सौंपा गया था, उनमें चांदी की मात्रा ऊंट के मुंह में जीरे के समान यानी महज 0.23 प्रतिशत पाई गई।
इस धोखाधड़ी के सामने आने के बाद रेलवे की साख पर सवाल खड़े होने लगे थे, जिसके बाद बोर्ड ने इस पूरी व्यवस्था को ही बंद करने का कड़ा फैसला लिया।
मार्च 2006 से शुरू हुआ था सम्मान का सफर
रेलवे में विदाई के वक्त चांदी का सिक्का देने की शुरुआत मार्च 2006 में हुई थी। नियम के मुताबिक, हर रिटायर होने वाले कर्मचारी को सम्मान स्वरूप लगभग 20 ग्राम वजन का एक स्वर्ण मढ़ा (Gold Plated) चांदी का मेडल दिया जाता था। बीते दो दशकों में यह मेडल रेलवे परिवार का हिस्सा रहे हजारों लोगों के लिए एक अनमोल स्मृति चिन्ह बन चुका था। लेकिन अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के कारण यह परंपरा इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है।
दोषी सप्लायर पर गिरी गाज, स्टॉक पर भी रोक
सिक्का घोटाला उजागर होने के बाद रेलवे प्रशासन अब एक्शन मोड में है। नकली मेडल सप्लाई करने वाली कंपनी के खिलाफ न केवल एफआईआर दर्ज की गई है, बल्कि उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास जो भी पुराना मेडल स्टॉक बचा है, उसे अब किसी भी कर्मचारी को उपहार में नहीं दिया जाएगा। इस बचे हुए स्टॉक का इस्तेमाल अन्य प्रशासनिक कार्यों में किया जा सकता है, लेकिन विदाई समारोहों से इनकी विदाई तय हो चुकी है।
31 जनवरी से लागू होगा नया नियम
रेलवे बोर्ड का यह आदेश किसी भविष्य की तारीख से नहीं, बल्कि तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसका सबसे पहला और सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो इसी महीने यानी 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। आदेश के मुताबिक, अब इस तारीख या इसके बाद रिटायर होने वाले किसी भी अधिकारी को चांदी का मेडल नहीं सौंपा जाएगा। सालों की सेवा के बाद घर लौटते वक्त कर्मचारियों के हाथों में अब वह खास मेडल नहीं दिखेगा, जिसकी उम्मीद वे सालों से लगाए बैठे थे।












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