Indian Railways: ट्रेन लेट होने के चलते छूट गई थी फ्लाइट, रेलवे को देना होगा इतना हर्जाना

नई दिल्ली, 9 अगस्त: भारतीय रेलवे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उसे उन रेल यात्रियों को मुआवजा देना होगा, जिनकी फ्लाइट ट्रेन लेट होने के चलते छूट गई थी। मामला 13 साल पुराना है, लेकिन अब रेल मंत्रालय के पास मुआवजा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। ट्रेन लेट होने का मामला प्रयागराज एक्सप्रेस का है, जो प्रयागराज (तबके इलाहाबाद जंक्शन)से नई दिल्ली स्टेशन के बीच चलती है। 2008 में वे यात्री नई दिल्ली से कोच्चि की फ्लाइट पकड़ने वाले थे, लेकिन ट्रेन 5 घंटे देर हो गई और फ्लाइट छूट गई।

ट्रेन लेट होने के मामले में रेल मंत्रालय को 'सुप्रीम' झटका

ट्रेन लेट होने के मामले में रेल मंत्रालय को 'सुप्रीम' झटका

नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन (एनसीडीआरसी) के एक आदेश के खिलाफ चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया। केंद्र सरकार ने अदालत में एनसीडीआरसी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसने ट्रेन लेट होने की वजह से फ्लाइट छूट जाने के चलते यात्रियों को 40,000 रुपये का मुआवजा देने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस रवींद्र भट की बेंच ने यह कहते हुए नोटिस जारी किया कि भारतीय रेलवे को ट्रेन में ज्यादा देर होने का अनुमान लगाना चाहिए था और यात्रियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।

मुआवजे के आदेश पर रोक नहीं- सुप्रीम कोर्ट

मुआवजे के आदेश पर रोक नहीं- सुप्रीम कोर्ट

दरअसल जिला उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में रेलवे की ओर से लारवाही और सेवा में कमी मानते हुए मुआवजा देने का आदेश किया था, जिसपर एनसीडीआरसी ने भी मुहर लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीडीआरसी के उस आदेश की पुष्टि करते हुए अपने बयान में कहा है कि 'हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि हम इस आदेश की तामील पर रोक नहीं लगा रहे हैं।' अदालत के बयान में यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता (केंद्र सरकार) आज से यानी 9 अगस्त से 4 सप्ताह के अंदर रजिस्ट्री में 25,000 रुपये जमा करेगी। यह रकम नेशनलाइज्ड बैंक में कम अवधि के लिए फिक्स डिपॉजिट की जाएगी, जिसमें ऑटो-रिन्यूअल की भी सुविधा हो।

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    क्या है पूरा मामला ?

    क्या है पूरा मामला ?

    बता दें रमेश चंद्रा और कंचन चंद्रा ने नई दिल्ली जाने के लिए प्रयागराज एक्सप्रेस पकड़ी थी, जिसे 12 अप्रैल, 2008 को सुबह 6.50 बजे नई दिल्ली स्टेशन पहुंचना था। लेकिन, ट्रेन करीब 5 घंटे देर हो गई और उस दिन सुबह 11.30 बजे नई दिल्ली पहुंची। ट्रेन में इतनी देर होने के चलते दोनों की कोच्चि जाने वाली फ्लाइट छूट गई। इसके बाद दोनों यात्री ने डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन का रुख किया और मानसिक प्रताड़ना और कठिनाई के लिए रेलवे के खिलाफ 19 लाख रुपये के मुआवजे का दावा ठोक दिया था।

    'यह लापरवाही और सेवा में कमी है'

    'यह लापरवाही और सेवा में कमी है'

    जिला उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित रेल यात्रियों की याचिका के आधार पर रेलवे को उन्हें 40,000 रुपये का हर्जाना देने को कहा। लखनऊ स्थित स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने भी इस आदेश को हरी झंडी दिखा दी और नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने भी उसे सही ठहराया। 21 अक्टूबर, 2020 को एनसीडीआरसी ने रेलवे के दावे को ठुकराते हुए कहा कि उसे देरी का अंदाजा लगाकर उसकी सूचना यात्रियों समेत शिकायतकर्ता को देनी चाहिए थी। इसलिए 'यह लापरवाही और सेवा में कमी है।' इसी आदेश को रेल मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती थी। जिसपर कोर्ट सुनवाई के लिए तो तैयार हो गया है, लेकिन उपभोक्ता फोरम के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

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