Indian Railways:इन 30 रेलवे स्टेशनों पर बच नहीं पाएंगे, मास्क में भी हो जाएगी पहचान

नई दिल्ली, 27 अगस्त: रेलवे और रेल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति लगता है कि केंद्र सरकार बहुत ही ज्यादा सजग हो रही है। अब महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर ऐसे सर्विलांस कैमरे लगाए गए हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से दर्जनों की भीड़ में भी लोगों की पहचान करने में सक्षम हैं। फिलहाल इसे उन 30 रेलवे स्टेशनों पर लगाया गया है, जहां डेली पैसेंजरों की बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। आने वाले वक्त में इसे बाकी स्टेशनों पर भी लगाने की संभावना है। अभी जो सिस्टम लगाए गए हैं वह रूसी कंपनी ने इंस्टॉल किए हैं।

रेल यात्रियों की पहचान कर लेंगे कैमरे

रेल यात्रियों की पहचान कर लेंगे कैमरे

दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में से एक भारतीय रेलवे ने हर दिन लाखों यात्रियों को ट्रैक करने के लिए लगभग 500 चेहरा पहचानने वाले कैमरे लगाए हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सिस्टम रूसी स्टार्ट-अप एनटेकलैब ने विकसित किए हैं। वनइंडिया इस रिपोर्ट की संबंधित अधिकारियों से स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार सर्विलांस का दायरा बढ़ा रही है और शायद यह कोशिश उसी की एक कड़ी है, ताकि रेल नेटवर्क को किसी भी खतरे से सुरक्षित किया जा सके।

पिछले महीने 30 स्टेशनों पर शुरू हुई पहचान

पिछले महीने 30 स्टेशनों पर शुरू हुई पहचान

रूसी फर्म की ओर से विकसित किए गया यह सिस्टम पिछले महीने देश के 30 भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर लाइव था। इस सिस्टम को फिलहाल महानगरीय इलाकों में डेली पैसेंजरों पर नजर रखने के लिए लगाया गया है, जिसमें ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाले गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के रेलवे स्टेशन शामिल हैं, जिसमें मायानगरी मुंबई भी एक है। मुंबई के उपनगरीय ट्रेनों से आमतौर पर रोजाना 70 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं।

पहचानने वाले कैमरों से क्या मदद मिलेगी ?

पहचानने वाले कैमरों से क्या मदद मिलेगी ?

एनटेकलैब के चीफ एक्जिक्यूटिव एंड्र्यू तेलेंकोव ने कहा है कि उनका यह सिस्टम कैमरे के एक प्रेम में एकसाथ 50 लोगों तक की पहचान कर सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर किसी रेल यात्री ने मेडिकल मास्क पहन रखी है, फिर भी उसे इस कैमरे की मदद से पहचाना जा सकता है। यही नहीं इन कैमरों की मदद से किसी भी समय यात्रियों की संख्या की भी गिनती की जा सकती है। तेलेंकोव के मुताबिक इस तकनीक की मदद से अपराधियों की भी पहचान हो सकती है, लाइफ फुटेज के जरिए चुनिंदा लोगों को खोजने में मदद मिल सकती है और गुमशुदा लोगों की भी तलाश की जा सकती है।

पूरे रेल नेटवर्क में हो सकता है विस्तार

पूरे रेल नेटवर्क में हो सकता है विस्तार

एनटेकलैब रूस में ऐसे कई प्रोजेक्ट पर पहले से काम कर रहा है और अकेले मास्को शहर में स्थानीय सरकार की ओर से उसने ऐसे 1,50,000 से ज्यादा कैमरे लगा रखे हैं। एंड्र्यू तेलेंकोव का कहना है कि 'वीडियो सर्विलांस के लिए भारत एक बहुत बड़ा बाजार है, विश्व में सबसे बड़ा है।.....अभी यह कुछ रेलवे स्टेशनों पर है, लेकिन मेरा मानना है कि वे पूरे नेटवर्क में इसका विस्तार करना चाहते हैं।'

विरोध में भी उठने लगी आवाज

विरोध में भी उठने लगी आवाज

हालांकि, आलोचकों को यह कोशिश भी खटकने लगी है और उन्होंने इस तरह से चेहरे की पहचान करने वाले सिस्टम को लोगों की निजता और आजादी पर प्रहार बताना शुरू कर दिया है। उन्हें यह भय सता रहा है कि इसकी मदद से प्रदर्शनकारियों की पहचान की जा सकती है। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक सरकार विरोधी रैली में शामिल एक हजार से ज्यादा किसानों की पहचान के लिए इसी तरह के त्रिनेत्र सिस्टम का पुलिस ने इस्तेमाल किया था। (तस्वीरें- सांकेतिक और फाइल)

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