भूटान के सहयोग से हिमालयन यूनिवर्सिटी बनायेंगे नरेंद्र मोदी

Narendra Modi in Bhutan
थिम्पू। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान की संसद में संयुक्त सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता के बीच कूटनीतिक संबंधों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संबंध हैं। भारत की जनता ने पूरे बहुमत के साथ नई सरकार को काम करने का मौका दिया है, अब हमारी जिम्मेदारी न केवल भारत को ऊंचाईयों पर ले जाना है, बल्कि पड़ोसी देशों को भी साथ लेकर चलना है।

मोदी ने कहा भूटान की बात करें तो भारत जितना आगे बढ़ेगा, भूटान भी उतना आगे बढ़ेगा। पिछले कुछ वर्षों में भारत-भूटान ने मिलकर ऊर्जा के क्षेत्र में एक मजबूत पहल की है। उस पहल को हम और आगे बढ़ायेंगे। भूटान में हाईड्रोपावर के माध्यम से बिजली उत्पादन करते हैं। भारत और भूटान के संयुक्त प्रयास ग्लोबल वॉर्मिंग से जूझ रहे पूरे विश्व के लिये एक सात्व‍िक प्रयास है।

भूटान एक कदम तो हम उसके संग दो कदम चलेंगे

मोदी ने कहा कि 2014 में भूटान ने श‍िक्षा के क्षेत्र में बजट बढ़ाने की घोषणा की है। उसका यह कदम आने वाली पीढ़ी के लिये है। भूटान एक कदम चलेगा हम उसके साथ दो कदम आगे बढ़ेंगे। हम अपनी टेक्नोलॉजी के माध्यम से यहां की श‍िक्षा को उच्चस्तरीय बनायेंगे। हम ई-लाइब्रेरी के माध्यम से ज्ञान के भंडार को साझा करेंगे। भूटान के नौजवानों को मैं भारत के विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिये आमंत्रित करता हूं। उसके लिये जो स्कॉलरश‍िप हम दे रहे हैं, उसे हम दोगुना करेंगे।

मोदी ने कहा- मैं लगातार भूटान के साथ संबंधों को व्यापक बनाने के बारे में सोचता हूं। जितने हिमालय राज्य हैं। वहां के लिये हम एक स्पेशल एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करना चाहते हैं। जिससे यहां से ज्ञान हमारे यहां आये और वहां से आपके यहां। हर वर्ष अलग-अलग प्रदेशों में खेल प्रतियोगितायें आयोजित की जायें, जिनमें भूटान के छात्रों को भी मौका दिया जाये।

हम आधुनिक विज्ञान के माध्यम से हर साल भूटान और भारत के बीच प्रतियोगितायें आयोजित करें। ताकि दोनों देशों के लोग एक दूसरे को करीब से समझ सकें।
भूटान में बहुत लोग हिंदी समझते हैं। अगर उनको थोड़ा भारतीय भाषाओं का ज्ञान प्रारंभ‍िक शिक्षा के दौरान हो जाये तो उनके भारत में पढ़ने के अवसर ज्यादा खुल सकते हैं।

पीएम ने कहा- लोग कहते हैं कि हिमालय हमें अलग करता है। मेरा सोचना यह है कि हिमालय हमें जोड़ता है। हिमालय हमारी सांझी विरासत है। हिमालय के उस पार रहने वाले भी उसे उतना ही प्यार करते हैं, जितना कि हिमालय के इस तरह रहने वाले। दोनों तरफ के क्षेत्रों के लिये हिमालय शक्त‍ि का स्रोत बना हुआ है। समय की मांग है कि वैज्ञानिक तरीके से पर्यावरण के संबंध में, प्राकृतिक संपदा के रूप में, इस विरासत का उपयोग आने वाली पीढ़ी के लिये कैसे किया जा सके, यह सोचना होगा।

भारत सोच रहा है कि हिमालय के लिये नेशनल मिशन चलाने के लिये, लेकिन उसमें अकेला भारत कुछ नहीं कर सकता। उसमें पड़ोसी देश भूटान के सहयोग की आवश्यकता है। हम चाहते हैं कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हिमालयन स्टडीज के माध्यम ससे यहां की प्राकृतिक परिवर्तनों, सभ्यता, संस्कृति आदि का अध्ययन किया जा सके। मैं जानता हूं कि इसका लाभ भूटान को भी बड़ी मात्रा में होगा।

पर्यटन पर मोदी- भूटान पर्यटन का गढ़ है। मैं मानता हूं कि दुनिया का पुरातन इतिहास जानने के लिये पर्यटक जरूर जानना चाहते हैं। पर्यटन ने वास्को दि गामा से लेकर आज के समय को जोड़ने का काम किया है। एक देश को दूसरे से जोड़ने का काम किया, विश्व को जोड़ने की ताकत है। मैं मानता हूं कि टेरेरिज्म डिवाइड्स, टूरिज्म यूनाइट्सद। भूटान और भारत संयुक्त रूप से विश्व की बड़ी पर्यटन योजना बना सकते हैं, इससे हिन्दुस्तान के नॉर्थ ईस्ट को भी लाभ मिल सकता है।

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