सर्विस से रिटायर हो रही है इंडियन नेवी की यह वॉरशिप, जानिए कुछ फैक्‍ट्स

मुंबई। इंडियन नेवी का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विराट अब इंडियन नेवी का हिस्‍सा नहीं रहेगी। इंडियन नेवी जल्‍द ही इस वॉरशिप को सर्विस से रिटायर करने जा रही है। आईएनएस विराट कोई मामूली वॉरशिप नहीं है बल्कि एक ऐसी वॉरशिप है जो इंडियन नेवी की पहचान बन गई थी।

12 मई 1987 को इंडियन नेवी में कमीशन होने से पहले आईएनएस विराट रॉयल नेवी यानी ब्रिटेन की नेवी फोर्स का हिस्‍सा थी यानी यह पहली ऐसी वॉरशिप है जो ब्रिटेन में निर्मित है।

वर्ष 2013 में एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्‍य इडियन नेवी में कमीशन हुआ। आईएनएस विराट विक्रमादित्‍य से पहले इंडियन नेवी की पहचान और हिंद महासागर पर भारत का बादशाह था।

आईएनएस विराट से जुड़े ऐसे ही कुछ फैक्‍ट्स पर एक नजर।

दर्ज है एक रिकॉर्ड

दर्ज है एक रिकॉर्ड

आईएनएस विराट नवंबर 1959 में बतौर एचएमएस हेरम्‍स के नाम के साथ ब्रिटिश नेवी का हिस्‍सा बनी थी। यह दुनिया का पहला ऐसा एयरक्राफ्ट है जिसके नाम पर सर्वाधिक नेवल ऑपरेशंस में शामिल होने का रिकॉर्ड है।

आईएनएस विक्रमादित्‍य से पहले समंदर का सरताज

आईएनएस विक्रमादित्‍य से पहले समंदर का सरताज

वर्ष 2013 में एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्‍य इडियन नेवी में कमीशन हुआ। आईएनएस विराट विक्रमादित्‍य से पहले इंडियन नेवी की पहचान और हिंद महासागर पर भारत का बादशाह था।

बदल गया नाम भी

बदल गया नाम भी

12 मई 1987 को इंडियन नेवी में कमीशन होने के साथ ही इस वॉरशिप का नाम बदलकर आईएनएस विराट हो गया।

तय किया मीलों का सफर

तय किया मीलों का सफर

वर्ष 2012 तक आईएनएस विराट ने 40,000 घंटे से ज्‍यादा का समय पानी पर बिता लिया था और इसने करीब दुनिया के सात समंदरों पर 5,00,000 नॉटिकल माइल्‍स की दूरी तय कर ली थी। इसके अलावा इस एयरक्राफ्ट के डेक से 20,000 घंटे की फ्लाइंग का भी रिकॉर्ड दर्ज है। ‍

तीन नेवी चीफ कर चुके हैं कमांड

तीन नेवी चीफ कर चुके हैं कमांड

आईएनएस विराट इंडियन नेवी की पहली ऐसी वॉरशिप है तीन ऐसे नेवी ऑफिसर्स ने कमांड किया जो आगे चलकर इंडियन नेवी के चीफ बने। यह भी अपने आप में एक खास बात है।

कौन-कौन से एयरक्राफ्ट्स

कौन-कौन से एयरक्राफ्ट्स

आईएनएस विराट की एयर स्‍क्‍वाड्रन में इंसास 300 सी फ्लाइंग हैरियर्स यानी ‘व्‍हाइट टाइगर्स', इंसास 552 द ‘ब्रेव्‍स' फ्लाइंग सी हैरियर्स, इंसास 321 ‘एंजल्‍स' चेतक और इंसास 330 ‘हारपून' फ्लाइंग सी किंग्‍स शामिल थे। इमरजेंसी के समय आईएनएस विराट से 30 हैरियर्स को एक साथ ऑपरेट किया जा सकता था।

कोचिन शिपयार्ड की देखभाल

कोचिन शिपयार्ड की देखभाल

वर्ष 1987 में जब से आईएनएस विराट इंडियन नेवी में कमीशन हुआ तब से ही वह कोचिन शिपयार्ड की देखरेख में था। यह कोचिन शिपयार्ड के स्‍टाफ का आईएनएस विराट के लिए समर्पण भाव ही था कि इसने तय समय से ज्‍यादा समय तक इंडियन नेवी को अपनी सर्विसेज दी थीं।

फरवरी 2015 में शुरू हुई विदाई की तैयारियां

फरवरी 2015 में शुरू हुई विदाई की तैयारियां

फरवरी 2015 में इंडियन नेवी ने वर्ष 2016 में इस वॉरशिप को डि-कमीशन करने की योजना का ऐलान कर दिया था। इसके बाद से रक्षा मंत्रालय से इसकी मंजूरी हासिल करने की तैयारियां शुरू हो गईं।

अब बनेगा टूरिज्‍म स्‍पॉट

अब बनेगा टूरिज्‍म स्‍पॉट

20 करोड यानी करीब तीन मिलियन डॉलर की रकम खर्च करके इस वॉरशिप का टूरिस्‍ट स्‍पॉट में तब्‍दील किया जाएगा।

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