भारतीय वैज्ञानिक ने ढूढ़ा कैंसर का उपचार, सचिन तेंदुलकर को किया समर्पित

उन्होंने कहा कि उन्होंने कैंसर के उपचार में ए20 जीन की भूमिका के अध्ययन के लिए एक ट्रांसजेनिक जानवर मॉडल तैयार किया है। कोलंबिया युनिवर्सिटी में पोस्टडॉक्टरल वैज्ञानिक डे ने फोन पर बताया कि मैंने जानवरों में ए20 जीन की क्रिया के अध्य्यन के लिए एक ट्रांसजेनिनक चूहा बनाया है। यह हमें उस प्रक्रिया को समझने में मदद करेगा जिससे स्वस्थ लोगों और रोगियों में ए20 काम करता है।
उन्होंने बताया कि ए20 एक ट्यूमर अवरोधक है और यह जीन बहुत से कैंसरों में दुष्क्रियाशील है। उन्होंने बताया कि उदाहरण के लिए हमने पाया कि बी कोशिका लिंफोमा और फेफड़ों के कैंसर, दोनों के रोगियों के इस जीन में परिवर्तन हुआ। हमने एकल ए20 की एकल अमीनो एसिड उत्परिवर्तन के लिए मूल कोशिकाओं का प्रतिरूपण किया।
इसके बाद हमने इन बायोइंजीनियरिंग मूल कोशिकाओं को ब्लास्टोसिस्ट्स में लगाया और बाद में ट्रांसजेनिक जानवरों को इन मूल कोशिकाओं से जोड़ा। डे ने बताया कि ए20 के बारे में पूर्व धारणा के अनुसार इन जानवरों में विभिन्न रोगों के विकसित होने की अनुमान था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ये जानवर स्वस्थ रूप में विकसित हुए। ऐसे में जाहिरतौर पर यह समझना जरूरी है कि यह कार्य कैंसर रोगियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है।"
डे दो उच्चस्तरीय परियोजनाओं से जुड़े हैं और अंतर्राष्ट्रीय रूप से विख्यात भारतीय अमेरिकी प्रतिरक्षा विज्ञानी (इम्यूनोलॉजिस्ट) शंकर घोष के साथ काम कर चुके हैं। डे ने कोलंबिया युनिवर्सिटी से पीएचडी की है। और वह क्रिकेट प्रेमी भी हैं। उन्होंने अपना शोध समर्पित करने के लिए सचिन तेंदुलकर को चुना है।












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