Indian Citizenship: हर साल भारत से भाग रहे लाखों अमीर लोग, ले रहे विदेशों में नागरिकता, वजह कर देगी हैरान
Indian Citizenship: हर साल भारत के लाखों अमीर और उच्च शिक्षित लोग अपने देश को छोड़कर विदेशों की नागरिकता लेने की राह पकड़ रहे हैं। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक घटना भी है जो देश की प्रगति और उसके भविष्य को सीधे प्रभावित करती है।
क्या है नागरिकता छोड़ने की वह असली वजह?
भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है। भारत का संविधान भारतीयों को दोहरी नागरिकता रखने की अनुमति नहीं देता है। इटली, आयरलैंड, पराग्वे, अर्जेंटीना जैसे देशों में दोहरी नागरिकता के प्रावधान हैं। इन देशों की नागरिकता आसानी से मिल जाती है। भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार भारत में नागरिकता प्राप्त की जा सकती है, लेकिन भारत के नागरिक रहते हुए आप दूसरे देश के नागरिक नहीं रह सकते हैं। इसी कारण नागरिकता छोड़ने की कई वजह सामने आती हैं।

-विदेशों में बेहतर रहन-सहन, पढ़ाई-लिखाई के मौके
-विदेशों में ज्यादा कमाई भी बड़ी वजह
-बेहतर हवा, पानी और पर्यावरण
-बेहतर टैक्स पॉलिसी
-काम के हर घंटे के हिसाब में से ज्यादा पैसे
-हायर एजुकेशन के लिए विदेशों में जाते हैं भारतीय युवा
-ड्यूल सिटिजनशिप की अनुमति न होना
-राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता के कारण
हर साल कितने लोग बस रहे विदेशों में?
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर साल करीब डेढ़ लाख भारतीय अपने देश की नागरिकता छोड़ रहे हैं। भारत की नागरिकता छोड़कर इन लोगों ने 135 देशों की नागरिकता हासिल की है। इनमें अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देशों से लेकर थाईलैंड, मलेशिया, पेरू, नाइजीरिया और जांबिया जैसे छोटे देश भी शामिल हैं। इन डेढ़ लाख लोगों में से अधिकतर लोग रोजगार के चलते भारत की नागरिकता छोड़ देते हैं।
भारतीय अपनी नागरिकता छोड़ कहां ज्यादा बस रहे हैं
भारतीय मूल के अधिकतर लोग अपनी नागरिकता छोड़कर अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके, जर्मनी, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, पेरू, नाइजीरिया, जांबिया जैसे देशों में बस रहे हैं। कुछ भारतीय पाकिस्तान और चीन में भी अपनी नागरिकता छोड़कर बस रहे हैं।
राजस्व में आ सकती है भारी कमी
भारत से अमीर व्यक्तियों भारतीय नागरिकता त्यागने की यह मुद्दा बेहद गंभीर है, जिसे सरकार और समाज को मिलकर समझने और इसका समाधान निकालने की जरूरत है। नागरिकता छोड़ने के कारण भारत में "ब्रेन ड्रेन" की समस्या उत्पन्न हो रही है, जिससे उच्च कौशल वाले पेशेवरों और उद्यमियों की कमी हो सकती है। इसके अलावा, टैक्स राजस्व में भी कमी आने की संभावना है ।
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