भारतीय अंटार्कटिक विधेयक 2022 क्या है, इसे क्यों लाना पड़ा, फायदे क्या होंगे ? हर बात जानिए
नई दिल्ली, 22 जुलाई: लोकसभा ने शुक्रवार को भारतीय अंटार्कटिक विधेयक 2022 को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। यह विधेयक अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत अंटार्कटिका क्षेत्र में भारतीय कानून को स्थापित करने की व्यवस्था देता है। अभी वहां पर भारत का अपना कोई कानून लागू नहीं होता। लेकिन, इस विधेयक के कानून में तब्दील होने के बाद भारतीय मिशन से जुड़े लोगों और भारतीय मिशन के इलाके में भारतीय कानून मान्य होंगे और दोषियों की सुनवाई भारतीय अदालतों में होंगी।

अंटार्कटिका में भारत के दो केंद्र सक्रिय हैं
लोकसभा ने शुक्रवार को भारतीय अंटार्कटिक विधेयक 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। संसद के निचले सदन में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे 1 अप्रैल को पेश किया था। इस विधेयक का मकसद अंटार्कटिका के पर्यावरण और उसकी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए भारत के अपने राष्ट्रीय कानून को लागू करना है। अंटार्कटिका पृथ्वी के सबसे दक्षिणी हिस्से में स्थित महाद्वीप है। दुनिया भर के विभिन्न देशों ने यहा रिसर्च के लिए अपने केंद्र स्थापित कर रखे हैं। भारत के भी वहां दो सक्रिय अनुसंधान केंद्र हैं- शिरमाकर हिल्स में मैत्री ( 1989 में कमीशन) और लार्समैन हिल्स में भारती ( 2012 में कमीशन)। भारत का अंटार्कटिका कार्यक्रम 1981 में ही लॉन्च हुआ था और पहला केंद्र दक्षिण गंगोत्री 1983 में बनाया गया था।

भारत ने 40 अंटार्कटिक अभियान पूरे किए हैं
1 दिसंबर, 1959 को 12 राष्ट्रों ने एक अंटार्टिक संधि पर हस्ताक्षर किए थे। भारत ने इस संधि पर 19 अगस्त, 1983 को दस्तखत किए थे। इस संधि का उद्देश्य अंटार्कटिका को सैन्य गतिविधियों से अलग रखना, इस शांतिपूर्ण शोध के जोन के तौर पर स्थापित करना और क्षेत्रीय संप्रभुता से संबंधित सभी तरह के विवादों को दूर रखना है। इस संधि के बाद 12 सितंबर, 1983 को भारत ने परामर्शदात्री का दर्जा प्राप्त कर लिया। भारत ने अभी तक अंटार्कटिका में 40 सालाना वैज्ञानिक अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है।

अंटार्कटिक विधेयक क्यों लाया गया है ?
भारतीय अंटार्टिक विधेयक 2022 पर सदन में हुई संक्षिप्त चर्चा के बाद डॉक्टर जितेंद्र ने कहा कि अंटार्कटिक इलाके में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि न होने पाए, किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधियां ना हों, परमाणु गतिविधियों पर भी रोक रहे और जो भी अनुसंधान केंद्र वहां पर हैं, वे सिर्फ अपने को रिसर्च तक ही सीमित रखें। पृथ्वी विज्ञान मंत्री के मुताबिक, 'अपने देश के दो सक्रिय केंद्र हैं और दूसरे देशों के भी अनुसंधान केंद्र है। यह विधेयक इसी वजह से लाया गया है, जो कि अंटार्कटिक के भारतीय क्षेत्र पर लागू होगा।'

भारतीय अंटार्कटिक विधेयक 2022 क्या है ?
अभी अंटार्कटिक क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून लागू होता है। लेकिन, इस विधेयक के कानून में बदलने के बाद भारतीय क्षेत्र में और उसके मिशन से जुड़े लोगों पर भारतीय कानून लागू होगा, जिसकी सुनवाई भारतीय अदालतों में होगी। मतलब, भारतीय मिशन के क्षेत्र या उसके लिए गए लोगों से हुई गलतियों, अपराधों, अनियमितताओं पर कार्रवाई भारतीय कानूनों के तहत होगी। इस विधेयक के माध्यम से अंटार्कटिक संधि, अंटार्कटिक समुद्री जीव संसाधन संबंधी कनवेंशन और अंटार्कटिक संधि के तहत पर्यावरणीय संरक्षण पर निर्धारित प्रोटोकॉल को प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।

भारतीय अंटार्कटिक विधेयक क्या फायदे होंगे ?
इस बिल के माध्यम से अंटार्टिका क्षेत्र अनुसंधान के लिए आवश्यक गतिविधियों के अलावा किसी भी तरह की खुदाई, उत्खनन, ड्रिलिंग या खनिज संसाधनों के दोहन या जमा करने पर पूरी तरह की पाबंदी रहेगी।
- वैज्ञानिक शोध के लिए भी अगर इन गतिविधियों की आवश्यकता होगी तो उसके लिए पहले से इजाजत लेनी होगी।
- इस विधेयक के तहत अंटार्कटिका में पाए जाने वाले जीव, पक्षी, पौधों और सील मछलियों को किसी तरह से नुकसान पहुंचाना अपराध माना जाएगा।
- गोला-बारूद का किसी भी तरह से इस्तेमाल, जिससे यहां के पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है या यहां के जीव-जंतुओं को परेशानी हो सकती है, उसपर पाबंदी रहेगी।
- एक बात और है कि इस बिल में यह भी प्रावधान है कि ऐसे पशु-पक्षियों, जीवों या पौधे वहां नहीं ले जाए जा सकेंगे, जो वहां पर प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते।
- विधेयक के कानून में तब्दील होने के बाद उसका उल्लंघन करने पर सजा और जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।(अंटार्कटिका की तस्वीरें-फाइल)












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