भारतीय वायुसेना को इस महीने के अंत तक मिलेगा AESA रडार सिस्टम, तेजस के सभी विमानों में होगा इंस्टॉल
नई दिल्ली, दिसंबर 08। इंडियन एयरफोर्स इस महीने के अंत में स्वदेशी रूप से निर्मित रडार - एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन अरै (AESA) का प्रदर्शन करेगी। इस रडार के विकसित होने के बाद भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जिनके पास एक फोर्स मल्टिप्लायर है जो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, लंबी दूरी की मिसाइलें और गाइडेड गोलाबारूद का मुकाबला कर सकता है। ये जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार डेवलपमेंट एस्टाब्लिशमेंट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डी शेषगिरी ने दी है। उन्होंने बताया है कि एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन अरै रडार 95 फीसदी स्वदेशी। इसका निर्माण आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत किया गया है।

अगले 5 साल में तेजस से सभी फाइटर जेट में होगा ये रडार
डी शेषगिरी ने इसकी खासियत के बारे में बात करते हुए कहा है कि इसमें केवल एक इंपोर्टेड सबसिस्टम है, जो 100 किमी से अधिक की सीमा में आकाश में अपने 50 टारगेट को ट्रैक करने और उनमें से चार को एक साथ नष्ट करने की क्षमता रखता है। आपको बता दें कि अगले पांच साल में वायुसेना के तेजस के सभी 83 लड़ाकू विमानों में यह रडार इन्सटॉल होगा। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा विकसित भविष्य के जुड़वां इंजन AMCA फाइटर के पास भी ये रडार होंगे।
शेषगिरी के अनुसार, AESA रडार को Su-30 MKI विमान के राडार कोन के साथ-साथ भारतीय सेना के वाहक-आधारित MiG-29 K लड़ाकू विमानों पर लगाया जाएगा। शेषगिरी के मुताबिक, पहले से ही, एलआरडीई ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ तेजस एमके I ए पर रडार के प्रमुख इंटीग्रेटर होने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें बीईएल सहित चार विक्रेता सबसिस्टम्स के सप्लायर हैं।
आपको बता दें कि शुरुआती 16 तेजस एमके 1ए विमान इजरायली ईएलएम 2052 एईएसए रडार से लैस होंगे और बाकी स्वदेशी AESA रडार से लैस होंगे। शेषगिरी ने कहा 'रडार का ट्रायल पहले ही दो तेजस लड़ाकू विमानों के साथ-साथ हॉकर सिडली 800 एग्जीक्यूटिव जेट पर 250 घंटे से अधिक समय तक किया जा चुका है।












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