26/11 जैसे हमलों को दावत दे रहे देश के 75 बंदरगाह!
बेंगलुरु। वर्ष 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले 26/11 की याद अभी तक ताजा है। लेकिन इस आतंकी हमले से अभी तक कोई सबक नहीं लिया गया है। इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की एक रिपोर्ट की मानें तो देश के 75 बंदरगाहों ऐसे हैं जहां सुरक्षा के इंतजाम जीरो हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब देश पर बड़े आतंकी हमले का अंदेशा जताया जा रहा है।

कौन-कौन से बंदरगाह
रिपोर्ट के मुताबिक देश के 12 अहम बंदरगाहों पर तो कड़ी सुरक्षा है लेकिन बाकी बंदरगाहों पर मौजूद हालात चिंता का विषय हैं। आईबी की इस ऑडिट रिपोर्ट में साफ कहा है कि जो बंदरगाह आतंकियों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं वे ज्यादातर छोटे बंदरगाह हैं।
ये बंदरगाह गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, पुड्डचेरी, गोवा, अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, केरल और ओडिशा राज्यों में आते हैं। गुजरात देश का वह राज्य है जहां पर छोटे बंदरगाहों की भरमार हैं।
45 बंदरगाहों पर नहीं कोई सुरक्षा
देश में 45 बंदरगाहों पर किसी तरह का कोई काम नहीं होता है और ये ऐसे ही खाली पड़े हैं। ये ही वह पोर्ट हैं जिनका प्रयोग एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए लोग करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बंदरगाहों पर भले ही गतिविधियां न के बराबर हों लेकिन इन्हें सुरक्षा के लिहाज से खाली नहीं छोड़ा जा सकता है।
बिना जांच के दाखिल होते कर्मी
मुंबई आतंकी हमले के बाद भी तटीय इलाकों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई तरह की सलाह दी गई थीं। इन सभी बंदरगाहों पर स्कैनर इंस्टॉल करने, एक रिकॉर्ड बुक मेनटेन करने और सीसीटीवी लगाने की बात कही गई थी लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं किया गया है।
हालात ऐसे हैं कि किसी भी कर्मी की सुरक्षा जांच के लिए भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कोई भी कर्मी आसानी से अंदर आ सकता है जबकि नियमों के मुताबिक हर कर्मी की भी जांच को अनिवार्य किया गया है।
गुजरात और महाराष्ट्र सबसे ज्यादा खतरनाक
मुंबई हमले के बाद महाराष्ट्र के बंदरगाहों पर खस्ताहाल सुरक्षा इंतजामों की पोल खुल गई थी। ऑडिट रिपोर्ट में महाराष्ट्र और गुजरात की सुरक्षा पर सवाल उठाए गए हैं।
गुजरात के बंदरगाहों से तस्करी के काम को बड़े स्तर पर अंजाम दिया जाता है। हाल ही में दो ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं जिनमें तस्कर गुजरात के रास्ते दाखिल हुए थे।












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