क्या अमेरिका के दबाव में झुकेगा भारत? मोदी सरकार को क्या करना चाहिए, RSS से जुड़े SJM ने दी ये बड़ी सलाह
India vs US tariff Row: अमेरिका ने भारत के निर्यात पर 25% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी दी है, जिससे दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों का अमेरिकी बाजार में निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इसे लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को नसीहत देते हुए कहा है कि भारत को अमेरिका के दबाव में नहीं झुकना चाहिए।
SJM के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा, "भारत अब वो नहीं रहा जो एक दशक पहले था। अगर अमेरिका को लगता है कि दबाव डालकर वो भारत से फैसले करवा सकता है, तो यह उनकी भूल है। ये 10 साल पहले वाला भारत नहीं है।" उन्होंने जोर दिया कि भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ना चाहिए।

SJM ने दोहराया: भारत के रणनीतिक फैसले किसी विदेशी दबाव में नहीं होंगे
स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने दो टूक कहा है कि भारत को रक्षा उपकरणों की स्वतंत्र खरीद और सस्ते कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है, क्योंकि ये दोनों ही राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने और देश में महंगाई को काबू में रखने के लिए बेहद जरूरी हैं।
SJM ने कहा कि भारत के रणनीतिक फैसले विदेशी दबाव के तहत नहीं लिए जा सकते, खासकर तब जब भारत अब एक वैश्विक शक्ति बनकर उभर चुका है-जिसका स्पष्ट उदाहरण हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में देखने को मिला।
अश्विनी महाजन ने मोदी सरकार से कहा कि वह देश के हितों की रक्षा करे, अपनी स्वतंत्र नीति पर कायम रहे और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में तेजी से काम करती रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर व्यापार में थोड़ी परेशानी आती है, तो उससे घबराने की जरूरत नहीं है। ये मुश्किलें भारत को और मजबूत बनाएंगी और देश जरूरी चीजों में आत्मनिर्भर बन सकेगा।
अमेरिका की रणनीति पर क्या बोला SJM?
SJM का कहना है कि अमेरिका भारत पर दबाव डालकर FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) में जीएम फूड्स, मेडिकल डिवाइसेज और डेटा फ्लो के दरवाजे खोलवाना चाहता है। लेकिन भारत ने अब तक मजबूती से विरोध किया है।
अश्विनी महाजन ने सरकार की तारीफ करते हुए कहा, "हमारे किसान, लघु उद्योग और आत्मनिर्भरता के हित में समझौता नहीं होना चाहिए।"
अश्विनी महाजन ने कहा, "अब समय है कि अमेरिका अपनी यूनिपोलर सोच छोड़े और मल्टी-पोलर दुनिया को स्वीकार करे। व्यापार आपसी लाभ के लिए हो, दबाव का हथियार न बने।"
मंच ने अमेरिका की "एकध्रुवीय सोच" को अब पुराना बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया सहयोगात्मक और बहुध्रुवीय व्यापार व्यवस्था को अपनाए।
SJM ने यह भी आलोचना की कि जब पूरी दुनिया को चीन की दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर नियंत्रण और वैश्विक सप्लाई चेन में उसके हस्तक्षेप से निपटना चाहिए, उस समय अमेरिका ने भारत जैसे रणनीतिक साझेदार को निशाना बनाना चुना है-जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
RSS से जुड़े SJM ने भारत सरकार को अमेरिका के दबाव में न आने की सलाह दी है और साथ ही भारतीय बाजार, रक्षा, डेटा और किसानों की रक्षा में सरकार के रुख की सराहना की है। आने वाले दिनों में यह मामला भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को और गरमा सकता है।
अमेरिका का बड़ा झटका: कोई छूट नहीं
🔹अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश से भारत पर लगाए गए नए टैरिफ के तहत, भारत को किसी भी उत्पाद या सेक्टर में कोई छूट नहीं दी गई है, जबकि चीन जैसे देशों को दवाओं, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स में राहत मिली है।
🔹वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल (GTRI) के मुताबिक इससे भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्र फार्मा (₹9.8 अरब डॉलर), स्मार्टफोन (₹10.9 अरब डॉलर) और पेट्रोलियम उत्पाद (₹4.1 अरब डॉलर) को तगड़ा झटका लगेगा।
🔹GTRI के मुताबिक, भारत का कुल माल निर्यात FY2025 में $86.5 अरब था, जो FY2026 में घटकर $60.6 अरब तक आ सकता है।












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