कोविड-19 चुनौतियों के बीच भारत-अमेरिका सहयोग से आर्थिक गतिशीलता को मिलेगा बढ़ावा- राजनाथ सिंह
क्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसने वैश्विक स्तर पर व्यवसाय को बाधित किया है।
नई दिल्ली, 15 सितंबर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसने वैश्विक स्तर पर व्यवसाय को बाधित किया है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका सहयोग आर्थिक गतिशीलता को बढ़ावा देने में एक लंबा रास्ता तय करेगा।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है, औद्योगिक गतिविधियां मंद पड़ गई हैं, पर्यटन उद्योग में नेगेटिव ग्रोथ देखने को मिल रही है और इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत-अमेरिका सहयोग सामान्य स्थिति बहाल करने और आर्थिक गतिशीलता को और बढ़ावा देने के लिए एक लंबा सफर तय करेगा। उन्होंने ये बातें इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित इंडो-यूएस इकोनॉमिक समिट में कहीं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे उपाय आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की पहली तिमाही में पिछले वर्ष पिछले साल हुई 24% की गिरावट के विपरित 20% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह सुधार भारत के बेहतर आर्थिक बुनियादी ढांचे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हम न केवल वित्तीय वर्ष 2022 बल्कि पूरे दशक में गतिशील विकास की तैयारी कर रहे हैं।
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मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने, निवेशकों के लिए भारत को व्यापार करने का एक अनुकूल स्थान बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने पिछले 100 महीनों में कई प्रमुख संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक सुधार लाए हैं, जिसने भारत को इस दशक में विकास के मामले में एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार किया है। अमेरिकी उद्योग से भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया एंड मेक फॉर द वर्ल्ड' विजन में सहयोग का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में रेड टेप(लाल फीताशाही) ने रेड कार्पेट की जगह ले ली है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमने प्रगतिशील और निवेशक अनुकूल कर नीतियां बनाई हैं। हमने रेट्रोस्पेक्टिव टेक्स को अलविदा कहा है और पिछली सरकारों की गलती को सुधारा है। श्रम सुधारों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि दर्जनों कानूनों को कोड के चार समूहों में बांट दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 209 रक्षा उत्पादों के आयात पर बैन लगाया है, इस फैसले से व्यापार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी और भारतीय रक्षा उद्योगों के लिए सह-उत्पादन और सह-विकास की बहुत गुंजाइश है। भारतीय उद्योग अमेरिकी उद्योग को कलपुर्जों की आपूर्ति भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच से सात वर्षों के दौरान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों ने अच्छी प्रगति की है।












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