भारत अफगानिस्तान में बनाए 'डेम', शुरू किए 6 अरब रुपए के 150 प्रोजेक्ट
नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को अफगान 2020 वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में भारी निवेश किया है। भारत ने अफगानिस्तान के लिए नई विकास पहलों का अनावरण किया, जिसमें काबुल में पानी की आपूर्ति करने के लिए एक बांध और 80 मिलियन डॉलर(लगभग 6 अरब डॉलर) की 150 सामुदायिक परियोजनाएं शामिल हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत अफगानिस्तान के विकास के लिए दीर्घकालिक भूमिका के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि भारत के 3 बिलियन डॉलर से अधिक के विकास पोर्टफोलियो का उद्देश्य अफगान लोगों और संस्थानों की क्षमताओं का निर्माण करना है। अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में फैली हमारी 400 से अधिक परियोजनाओं से आज अफगानिस्तान का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं है। जयशंकर ने काबुल शहर के दो मिलियन निवासियों को पीने का पानी मुहैया कराने के लिए काबुल नदी बेसिन में शहतूत बांध के निर्माण के लिए अफगानिस्तान के साथ एक समझौते की घोषणा की।
यह शहर को बिजली प्रदान करने के लिए 2009 में बनी 202 किलोमीटर लंबी पुल-ए-खुमरी बिजली ट्रांसमिशन लाइन पर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत अपने उच्च प्रभाव वाले सामुदायिक विकास परियोजनाओं की पहल के चौथे चरण के हिस्से के रूप में $ 80 मिलियन की कुछ 150 परियोजनाओं को भी लॉन्च करेगा। यह पहल उन छोटी परियोजनाओं पर केंद्रित है जिन्हें गांवों और जिलों में लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए तेजी से पूरा किया जा सकता है।
इसके साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल में अफगानिस्तान में बढ़ी हिंसा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि, अफगानिस्तान में हिंसा का बढ़ता स्तर स्वाभाविक रूप से गंभीर चिंता का विषय है। जब हम अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने के सभी प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में भारत देश में हिंसा को रोकने के लिए तत्काल और व्यापक युद्ध विराम का आह्वान करता है। शांति प्रक्रिया अफगान के नेतृत्व वाली, अफगान के स्वामित्व वाली और अफगान नियंत्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में शांति और विकास में भारी निवेश किया है। हमारा मानना है कि पिछले दो दशकों के लाभ को संरक्षित किया जाना चाहिए, और अल्पसंख्यकों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के हितों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।












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