भारत पर मंडरा रहा जैविक आतंकी हमले का खतरा
बेंगलुरु (कर्नाटक)। देश पर आतंकी हमले की फिराक में रहने वाले आतंकी संगठन अब आतंक का नया रास्ता तैयार कर रहे हैं। वो जानते हैं कि अब किसी शहर में बम धमाका करना आसान नहीं रह गया है, लिहाजा अब तैयारी है जैविक आतंकवाद की। जैविक आतंक यानी गंभीर बीमारियां फैलाकर देश के लोगों को खत्म करने का प्लान। अफसोसनाक बात यह है कि हमारा देश आतंकवाद से लड़ने में तो सक्षम है, लेकिन इससे निबटने के लिये कतई तैयार नहीं है।

मैसूर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के डा. कृष्णमूर्ति ने यह सवाल उठाया और देश को चेताया है कि आतंकवादी स्मॉलपॉक्स के वायरस फैला सकते हैं। और यह वो वायरस है जिससे निपटने के लिये हमारे डॉक्टर, नर्स व पूरा स्वास्थ्य विभाग कतई तैयार नहीं है।
उनकी इस छोटी सी चेतावनी ने गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। वो यह कि भारत में जैविक आतंकवाद कितना गंभीर है। हाल ही में विकीलीक्स ने अपने एक वायर में लिखा कि भारत पर जैविक आतंक का खतरा मंडरा रहा है।
क्या-क्या हो सकता है जैविक आतंक के फैलने से
- आतंकवादी बहुत ही आसानी से ऐंथरैक्स, स्मॉल पॉक्स के वायरस भारत में फैला सकते हैं।
- वायरल हीमोरेजिक फीवर, रैबिट फीवर अथवा ब्यूबोनिक प्लेग को फैलाना बेहद आसान हो सकता है।
- हंटा वायरस, सार्स, एच1एन1, एचआईवी-एड्स, निफा वायरस के माध्यम से भारी संख्या में लोग मारे जा सकते हैं।
- लश्कर-ए-तैयबा भारत पर जैविक हमला करने में सक्षम भी है।
- लश्कर मानता है कि यह उसका ट्रम्प कार्ड है, जब भारत के विरुद्ध सभी चालें विफल हो जायेंगी, तब वो इसे चलेगा।
- खुफिया विभाग ने कई बार पुलिस व बॉर्डर पुलिस को जैविक आतंकवाद के फैलने की चेतावनी दी है।
- लश्कर और अल-कायदा के आतंकी जैविक हमले करने के लिये दुनिया भर के वैज्ञानिकों से जुड़ने के प्रयास कर रहे हैं।
- कंधार में एक लैबोरेटरी भी स्थापित की गई। हालांकि उसके विरुद्ध कोई भी पुख्ता सबूत नहीं मिला।
- 1996 में भारत में हीमोरेजिक फीवर से भारी संख्या में लोगों की मौत हुई थी, लेकिन अब तक यह सिद्ध नहीं हुआ कि वह एक जैविक हमला था।












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