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Top 10: रोमांचकारी सफारी के हैं शौकीन तो देखें ये वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, खूब मिलेंगे शेर-तेंदुए, बाघ और हाथी

Oneindia.Com आज यहां आपको बताएगा भारत की उन प्रमुख वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बारे में, जहां रोमांचकारी सफारी का आनंद लिया जा सकता है। जिसमें टाइगर सफारी, लॉयन सफारी, एलिफेंट सफारी वाले जंगल प्रमुख हैं।

जूनागढ़। भारत में वन्यजीवों के लिए लाखों हेक्टेयर भूमि संरक्षित है। ऐसी भूमि जो जंगली जानवरों, पक्षियों, कीटों, सूक्ष्मजीवों समेत विभिन्न जीव-प्रजातियों का घर मानी जाती है- उसे 'वाइल्ड लाइफ सेंचुरी' कहते हैं। ये जगहें वन्यजीवों को स्वस्थ-सुरक्षित वातावरण प्रदान करती हैं। ये वो इलाका होती हैं, जहां वन्यजीव बिना किसी डर के दौड़-धूप कर सकते हैं। वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को हिन्‍दी में 'वन्यजीव अभयारण्य' कहा जाता है। हमारे देश में 500 से ज्यादा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी हैं, जिन्हें देखने-घूमने लाखों लोग पहुंचते हैं।

Oneindia.Com आज यहां आपको बताएगा भारत की उन प्रमुख वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बारे में, जहां रोमांचकारी सफारी का आनंद लिया जा सकता है। जिसमें टाइगर सफारी, लॉयन सफारी, एलिफेंट सफारी वाले जंगल प्रमुख हैं।

1. गिर फॉरेस्ट, गुजरात:

1. गिर फॉरेस्ट, गुजरात:

भारत में वन्यजीवों के लिए दुनिया की सबसे प्रसिद्ध वाइल्ड लाइफ सेंचुरीज हैं। जिनमें गिर वन राष्‍ट्रीय उद्यान को एशियाई शेरों की एकमात्र शरणगाह माना जाता है। और, यह शेरों की सफारी के लिए जानी जाती है। यह गुजरात में जूनागढ़ सिटी से 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में शुष्क झाड़ीदार पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है। यह लगभग 1,295 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। क्षेत्रफल के लिहाज से यह देश में सबसे बड़ा नेशनल पार्क है। गिर वन संरक्षित क्षेत्र की स्थापना 1913 में एशियाई शेरों के बचे हुए सबसे बड़े समूह को संरक्षण प्रदान करने के लिए की गई थी। अब यहां 300 से ज्यादा शेर रहते हैं। कोरोनाकाल में इसे लोगों के लिए बंद कर दिया गया था, कुछ महीनों बाद फिर एंट्री दी जाने लगी।

2. रणथंभौर, राजस्थान:

2. रणथंभौर, राजस्थान:

यह नेशनल पार्क बाघों के लिए प्रसिद्ध है, जो कि अरावली और विंध्य की पहाड़ियों में फैला है। इसे 1981 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला। बाघों के अलावा इस उद्यान के बाहरी हिस्से में चीते भी देखे जा सकते हैं। कचीदा घाटी उन्हें देखने के लिए सबसे उपयुक्त जगह है। साथ ही यहां सांभर, चीतल, जंगली सूअर, चिंकारा, हिरन, सियार, तेंदुए, जंगली बिल्ली और लोमड़ी भी पाई जाती हैं। यहां जंगली जानवरों के अलावा पक्षियों की लगभग 264 प्रजातियां यहां देखी जा सकती हैं। यदि आप जाना चाहते हैं तो जीप - सफारी द्वारा पूरे नेशनल पार्क का आनंद उठाया जा सकता है। जब आप यहां आएंगे तो पाएंगे कि रणथंभौर राष्ट्रीय अभ्यारणय की खूबसूरती, विशाल परिक्षेत्र और बाघों की मौजूदगी किस कदर वन्यजीव प्रेमियों को आकर्षित करती है। यह उद्यान देश के बेहतरीन बाघ आरक्षित क्षेत्रों में से एक है। इस वजह से यह दुनियाभर के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है।

3. बेतला नेशनल पार्क, झारखंड:

3. बेतला नेशनल पार्क, झारखंड:

यह देश के सबसे पुराने टाईगर रिजर्व में से एक है। इसे वर्ष 1974 में खोला गया। पहले इसे पलामू टाईगर रिजर्व के नाम से जाना जाता था। बाद में इसे बेतला राष्ट्रीय पार्क कहा जाने लगा। यहां 970 प्रजाति के पौधे, 174 प्रजातियों के पक्षी, 39 स्तनधारी, 180 प्रजाति के औषधीय पौधे पाए जाते हैं। साथ ही यहां बड़ी संख्या में बाघ, तेंदुआ, जंगली भालू, बंदर, सांभर, नीलगाय, मोर और चीतल आदि जानवर पाए जाते हैं। यहां के गर्म पानी के झरने में स्नान करने का अपना अलग ही मजा है। सरकार सफारी शुरू करा चुकी है।

4. नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, उत्तराखंड:

4. नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, उत्तराखंड:

यह हिमालय के अंचल में पड़ता है। यहां ठंडे प्रदेशों में पाए जाने वाले जीव-जंतु देखे जा सकते हैं। यह नंदा देवी पर्वत पर स्थित है। फूलों की घाटी भी इस राष्ट्रीय उद्यान के पास है। यह 1982 में राष्ट्रीय उद्यान बना था। फिर दोनों को वर्ष 1988 में सम्मिलित रूप से वर्ल्ड हैरिटेज साइट घोषित किया गया। यहां रंग-बिरंगे पक्षियों के अलावा कई प्रजातियों के सुंदर फूल और खूबसूरत तितलियां भी देखी जा सकती हैं।

5. कान्हा नेशनल पार्क, मध्य प्रदेश:

5. कान्हा नेशनल पार्क, मध्य प्रदेश:

यह मध्य प्रदेश के मंडला जिले में पड़ता है। इसे 1933 अभ्यारण्य के तौर पर स्थापित किया गया। उसके बाद 1955 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया। यहां अनेक पशु-पक्षियों को संरक्षित किया गया है। लगभग विलुप्त हो चुकी बारहसिंहा की प्रजातियां यहां देखने को मिल जाती है। एक वनाधिकारी ने कहा कि, यूं तो पूरे मध्य प्रदेश में कई राष्ट्रीय पार्क और जंगल हैं, लेकिन उनमें से कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों के बीच हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही है। यह एशिया के सबसे सुरम्य और खूबसूरत वन्यजीव रिजर्वो में एक है। और, इस पार्क को अनुसंधान एवं संरक्षण कार्यक्रमों के लिए भी जाना जाता है। यहां बाघ, बारहसिंघा सहित और भी कई तरह के जंगली जानवर रहते हैं।

6. सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिम बंगाल:

6. सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिम बंगाल:

यहां के बाघ दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। उन्हें रॉयल बंगाल टाइगर के रूप में जाना जाता है। बंगाल के मैंग्रोव वन से घिरे इस उद्यान के नमकीन पानी में मगरमच्छ भी खूब मिलते हैं। यह राज्य के दक्षिणी भाग में गंगा नदी के सुंदरवन डेल्टा क्षेत्र में स्थित है। दस्तावेजों के अनुसार, सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान 1973 में बाघ रिजर्व टेरिटोरियल तथा 1977 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित हुआ था। सन् 1984 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला।

7. काजीरंगा नेशनल पार्क, असम:

7. काजीरंगा नेशनल पार्क, असम:

पूर्वोत्तर भारतीय राज्य असम का यह राष्ट्रीय उद्यान इंडिया गैंडा के लिए प्रसिद्ध है। यहां एक सींग वाले गैंडे 'राइनोसेरोस - यूनीकोर्निस' मिलते हैं। यह नेशनल पार्क यूनेस्को के विश्व विरासत स्थलों की सूची में शामिल है और देश का घोषित वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र है। यह उबड़-खाबड़ मैदानों, लंबी-ऊंची घासों, आदिवासियों और भयंकर दलदलों से पूर्ण कुल 430 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। काजीरंगा असम के मध्य में एकमात्र वाइल्डलाइफ सेंचुरी है। यहां सर्दियों में साइबेरिया के पक्षी भी आते हैं। काजीरंगा में विभिन्न प्रजातियों के बाज, चीलें और तोते भी पाए जाते हैं। यहां सफारी का लुत्फ लिया जा सकता है।

8. पेरियार नेशनल पार्क, केरल:

8. पेरियार नेशनल पार्क, केरल:

दक्षिणी भारत के इस खूबसूरत वन्यजीव क्षेत्र को पेरियार राष्ट्रीय उद्यान भी कहते हैं। यह पेरियार नदी बेसिन का ही हिस्सा है।केरल में इस उद्यान की स्थापना 1950 में हुई थी। यहां भी बाघ बहुतायत मिलते हैं। सन् 1978 में पेरियार क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। यहां हाथी भी बड़ी संख्या में रहते हैं। वर्ष 1998 में जब हाथी संरक्षण परियोजना बनी, तब से यहां हाथी नदी के गहरे जल में तैरने का अभ्यास करते रहते हैं। बीचों-बीच मौजूद झील को 1895 में पेरियार नदी पर बांध के जरिए बनाया गया था, इसमें बोटिंग का मजा आप ले सकते हैं। यहां आने के लिए जून से अक्टूबर के बीच का समय चुन सकते हैं। आप सुहावने मौसम में कोट्टायम, अर्नाकुलम व मदुरै होते हुए पेरियार आएं। यहां भालू भी पाए जाते हैं।

9. बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान:

9. बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान:

यह मध्यप्रदेश राज्य में सन् 1968 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। यह टेरिटोरियल उमरिया जिले में पडता है। यहां आपको बाघ ज्यादा मिलेंगे। वर्ष 1993 में इसे टाईगर प्रोजेक्ट के अधीन लाया गया था। सड़कों के बीचों-बीच भी बांधवगढ के जंगली जानवर आप देख सकते हैं। यह वन क्षेत्र फ्लोरा और फना की प्रजातियों से भरा हुआ है। जंगल में नीलगाय और चिंकारा सहित हर तरह के वन्यप्राणी और पेड़ हैं। इसके अलावा सफेद चीते भी बताए जाते हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में पशुओं की 22 और पक्षियों की 250 प्रजातियां पाई जाती हैं। हाथी पर सवार होकर या फिर वाहन में बैठकर इन वन्यप्राणियों को देखा जा सकता है।

10. जिम कार्बेट नेशनल पार्क, उत्तराखंड:

10. जिम कार्बेट नेशनल पार्क, उत्तराखंड:

यह वही नेशनल पार्क है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग में हिस्सा लिया था। यहां के मनोहारी दृश्य और खूबसूरत नजारे देखकर आप मग्नमुग्ध हो जाएंगे। यह कुमाऊ पहाड़ियों के अद्भूत प्राकृतिक दृश्यों से घिरा जंगल है, जो रामगंगा नदी के किनारे बसा है। भारत में सबसे पुराना होने के साथ ही यह राष्ट्रीय उद्यान टाइगर रिजर्वो में से भी एक है। यह नैनीताल के निकट है और यहां हिमालय की पहाड़ियों पर विभिन्न वन्य-जीवों सहित वनस्पतियों का मनोरम नजारा देखा जा सकता है। उत्तराखंड में हाथी पर सवार होकर अभयारण्य का भ्रमण किया जा सकता है। यहां आप बाघ, तेंदुआ, हाथी, चीतल, हिरण, जंगली सुअर, बंदर और सियार आदि जानवर नजदीक से देख सकते सकते हैं। एक दिलचस्प बात यह है कि, पहले इसे रामगंगा पार्क कहा जाता था। बाद में 1957 में इसका नाम कॉर्बेट नेशनल पार्क रखा गया।

फोटो क्रेडिट: पीटीआई, नेशनल-पार्क की ऑथेंटिक वेबसाइट, एएनआई।

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