चीन सीमा के पास मेगा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट शुरू करेगा भारत, 20 साल से चल रहा था काम
भारत का एक बहुत ही पुराना मेगा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट इस साल से शुरू होने जा रहा है। चीन की सीमा के नजदीक 2.6 अरब डॉलर की लागत वाली इस विशाल जलविद्युत परियोजना पर 20 वर्षों से काम चल रहा है, लेकिन कभी कानूनी झंझटों तो कभी पर्यावरण बचाने को लेकर प्रदर्शनों की वजह से इसमें रुकावटें आती रही हैं।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की नेशनल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट लिमिटेड इस परियोजना पर ट्रायल रन जुलाई से सुबनसिरी लोअर प्रोजेक्ट में शुरू करेगा। यह प्रोजेक्ट असम और अरुणाचल प्रदेश में है।

दिसंबर में पहली यूनिट चालू हो जाएगी
वित्त निर्देशक राजेंद्र प्रसाद गोयल के मुताबिक इस प्रोजेक्ट की पहली यूनिट का दिसंबर में कमीशन हो जाने की उम्मीद है। लेकिन, 2024 के अंत तक सभी आठों यूनिट चालू हो जाएंगी। इस परियोजना को भारत के ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ने को लेकर बड़ा कदम माना जा रहा है।
2003 में ही शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
जलविद्युत परियोजना से बिजली की मांग में उतार-चढ़ाव की पूर्ति की जा सकती है। खासकर जब सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसमी वजहों से प्रभावित होता रहता है। वैसे 2 गीगावाट का यह प्रोजेक्ट 2003 के दिसंबर में ही शुरू हुआ था, लेकिन पर्यावरण को नुकसान की आशंका को लेकर प्रदर्शनों और मुकदमेबाजी की वजह से यह दो दशक तक लटकी रह गया।
देरी होने से लागत तीन गुना बढ़कर 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गई
इसका परिणाम ये हुआ कि इस प्रोजेक्ट की लागत तीन गुना बढ़कर 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। 8 साल तक काम ठप रहने के बाद 2019 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इसपर काम शुरू करने की हरी झंडी दी थी।
'निर्माण शुरू होने से पहले ही सभी तरह की छानबीन हो जाए'
गोयल ने कहा, 'हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू करने से पहले हमें विभिन्न विभागों से करीब 40 स्वीकृतियां लेनी पड़ती हैं। सभी तरह की जांच इसी स्टेज में होनी चाहिए। ' उनका कहना है कि 'निर्माण शुरू होने के बाद कोई भी रुकावट समस्या बढ़ाती है।'
दिबांग प्रोजेक्ट होगा सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट
चीन और पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बड़े बांध भी देश के लिए एक बेहतर जरिया है। अब जब सुबनसिरी का काम पूरा होने वाला है, एनएचपीसी 2.9 गीगावाट वाले दिबांग प्रोजेक्ट के निर्माण की योजना को अंतिम रूप दे रहा है, जो कि भारत में निर्मित होने वाला सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्लांट होगा।
हाइड्रोपावर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विशाल बांधों को क्लीन एनर्जी का दर्जा दिया है। यह राज्यों के बिजली वितरकों को जीवाश्म ईंधन से उत्पादित होने वाली बिजली से पहले जलविद्युत खरीदने को प्राथमिकता देने की ओर प्रेरित करता है। यही नहीं सरकार बांधों के निर्माण और कुछ मसलों में बाढ़ के प्रबंधन के लिए भी बजटीय सहायता के लिए भी तैयार हुई है।












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