अंडमान निकोबार से हुआ Brahmos सुपरसोनिक मिसाइल का एक और टेस्ट, 400 KM से ज्यादा हुई रेंज
नई दिल्ली। भारत ने मंगलवार को एक बार फिर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया है। रक्षा सूत्रों की तरफ से बताया गया है कि भारत ने अंडमान निकोबार द्वीप से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लैंड वर्जन का सफल परीक्षण किया है। इस मिसाइल का टारगेट क्षेत्र में मौजूद दूसरा द्वीप था। ब्रह्मोस का टेस्ट सुबह 10 के करीब किया गया है।
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बढ़ गई मिसाइल की रेंज
24 नवंबर को हुआ ब्रह्मोस के टेस्ट ने सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य को भेदा। इस टेस्ट को भारतीय सेना की तरफ से अंजाम दिया गया है। ब्रह्मोस मिसाइल रक्षा अनुसंधान एवं विकास (डीआरडीओ) की तरफ से तैयार किया गया है। नए टेस्ट के बाद अब मिसाइल की रेंज 400 किलोमीटर से ज्यादा हो गई है। ब्रह्मोस समेत बाकी मिसाइल्स के सभी टेस्ट्स ऐसे समय में हो रहे हैं जब पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन के साथ पांच माह से टकराव जारी है। विशेषज्ञों की मानें तो भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चीन की आक्रामकता के आगे नहीं झुकेगा।पिछले माह इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) ने भी ब्रह्मोस का परीक्षण किया था। उस समय मिसाइल ने 300 किलोमीटर तक के अपने लक्ष्य को भेदा था। पिछले दिनों डीआरडीओ की तरफ से बताया गया था कि नवंबर माह के अंतिम हफ्ते में ब्रह्मोस मिसाइलों के कई अहम टेस्ट्स किए जाने हैं। डीआरडीओ की तरफ से बताया गया था कि ये सभी टेस्ट्स हिंद महासागर क्षेत्र में होंगे।
क्या हैं ब्रह्मोस की खूबियां
- ब्रह्मोस को डीआरडीओ और रूस की एनपीओ माशीनोस्ट्रोनिया मिलकर डेवलप कर रहे हैं।
- मिसाइल पनडुब्बी, जहाज, एयरक्राफ्ट या जमीन से भी लांच की जा सकती है।
- 2.8 मैक या 3,400 प्रति घंटे की रफ्तार और 3,700 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हमला कर सकती है।
- ब्रह्मोस स्पीड में अमेरिकी सेना की मिसाइल टॉमहॉक से चार गुनी तेज है।
- इसकी रेंज 290 किमी से लेकर 300 किमी तक है।
- ब्रह्मोस का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस को मोस्कवा से मिलकर बना है।
- जहाज और जमीन से लांच होने पर यह मिसाइल 200 किलो वारॅहेड्स ले जा सकती है।
- वहीं एयरक्राफ्ट से लांच होने पर 300 किलो के वॉरहेड्स ले जाने में सक्षम।
- विशेषज्ञों की मानें तो 2.8 और 3.0 मैक की स्पीड इसे इंटरसेप्ट नहीं किया सकता है।
- अगर ऐसा करना है तो दुश्मनों को अपने सिस्टम को अपग्रेड करना होगा या फिर नया सिस्टम बनाना होगा।
- ब्रह्मोस को पहली बार 12 जून 2001 में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से लांच किया गया।
- 12 जून 2004 को इस मिसाइल को एक मोबाइल लांचर के जरिए लांच किया गया।
- भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है जिसके पास मन्यूवरबल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।












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